बजट के बाद कैबिनेट बैठक में भी बड़े फैसले, पुलिस को बेहतर बनाने पर होगा काम


सीएजी ने कहा है कि 2011 से 16 के बीच आवंटित 1165 करोड़ रुपये की तुलना में 41 फीसदी रकम का उपयोग नहीं हुआ। जून 2011 में स्वीकृत कमांडो ट्रेनिंग स्कूल का निर्माण तीन वर्ष में पूरा नहीं हो सका। इसके लिए कुल खर्च में 12.49 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी करनी पड़ी।
इसी तरह एमपीएफ योजना के तहत उपकरण की खरीद में भी पूरे धन का इस्तेमाल नहीं किया जा सका। इस दौरान पीएसी को 43.71 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। इसमें से 31.55 करोड़ रुपये ही खर्च हुआ। इससे बुलेट प्रूफ जैकेट, बुलेट प्रूफ हेलमेट, पाली कार्बोनेट ढाल और लेन सिम्युलेटर जैसे उपकरण नहीं खरीदे जा सके।
सीएजी में बताया गया है कि राज्य में 1985 से 2015 के बीच सड़क पर गाड़ियों की संख्या में 2256 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि इस दौरान ट्रैफिक पुलिस के स्वीकृत पद में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। विभाग में पुलिस कर्मियों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करने में देरी की गई। भर्ती पूरी करने के लिए तीन से छह साल का समय लगा दिया गया। इससे पुलिस बल में कमी की समस्या बढ़ी, जिससे कानून व्यवस्था को बनाए रखने पर गंभीर प्रभाव पड़ा।
दरअसल, प्रदेश में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में तैनात डेंटल सर्जनों के लिए दंत सर्जन सेवा नियमावली 1979 लागू है। प्रमोशन के पद कम होने के कारण इनको कई वर्षों बाद प्रमोशन मिल पाता था।
वहीं, इन्हीं के साथ तैनात पीएमएस डॉक्टरों को जल्दी-जल्दी प्रमोशन मिल जाते हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने पीएमएस डॉक्टरों की तर्ज पर डेंटल सर्जनों के भी प्रमोशन करने का निर्णय लिया है। इससे दोनों संवर्गों के प्रमोशन एक समान हो सकेंगे।
प्रदेश में डेंटल सर्जन के 300 पद हैं इनमें से केवल 190 पदों पर डॉक्टर तैनात हैं। उप्र. दंत सर्जन सेवा नियमावली में जरूरी संशोधन को मंजूरी मिलने से अब डेंटल सर्जन भी प्रमोट होकर संयुक्त निदेशक व निदेशक बन सकेंगे।
अब सभी चीनी मिलों को नियमों के तहत आरक्षित शीरे का निरंतर एवं अनिवार्य निस्तारण करना होगा। आरक्षित शीरे की बिक्री के लिए चीनी मिल के टेंडर के मुकाबले देसी शराब का उत्पादन करने वाली डिस्टलरी से कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं होता है तो टेंडर में उल्लिखित आरक्षित शीरे की मात्रा को शीरा नियंत्रक अनारक्षित शीरे में परिवर्तित कर देगा।
इससे देसी शराब उत्पादन के लिए 20 फीसदी की मात्रा स्वत: कम हो जाएगी। अगले माह इस प्रकार परिवर्तित की गई मात्रा और इसके मुकाबले फ्री सेल शीरे की मात्रा जो पिछले माह में नहीं बिकी है, को बेचने के लिए चीनी मिल स्वतंत्र होगी। इस पर 1:4 का निकासी अनुपात लागू नहीं होगा।
जमीन मिल जाने के बाद अब ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन जल्द ही उपकेंद्र और उससे संबंधित लाइनों के निर्माण का कार्य शुरू कराएगा। इस उपकेंद्र के निर्माण पर लगभग 200 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। उपकेंद्र बन जाने के बाद बलिया समेत आसपास के जिलों की बिजली आपूर्ति व्यवस्था बेहतर हो जाएगी।
परिषद में पूर्णकालिक उपाध्यक्ष की नियुक्ति होगी और परिषद के कार्यों के परीक्षण के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का दल भी गठित होगा। परिषद में कानूनी सलाहकार भी नियुक्त किया जाएगा। इसके लिए सरकार विधानमंडल में उप्र ब्रज नियोजन एवं विकास बोर्ड (संशोधन) विधेयक 2017 पेश करेगी। विधानमंडल में विधेयक पेश किए जाने संबंधी प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
यह विधेयक उप्र ब्रज नियोजन एवं विकास बोर्ड का नाम बदलकर उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद करने के लिए लाया जा रहा है। अब तक मुख्य सचिव बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष होते हैं। मूल अधिनियम में संशोधन करके उपाध्यक्ष पद पर राज्य सरकार पूर्णकालिक रूप से किसी व्यक्ति की नियुक्ति का प्रावधान करने जा रही है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधेयक को इसी सत्र में विधानमंडल के समक्ष पेश करने का रास्ता साफ हो गया है।





