सांप से भरे कुएं में जा गिरी महिला, 54 घंटों तक दीवार से चिपककर बचाई जान

परिवार वालों को जब वह घर नहीं लौटीं तो अगले दिन उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस को दी गई। रिपोर्ट मिलने के बाद बचाव दल ने खोजबीन शुरू की। इस खोज में थर्मल इमेजिंग वाले ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
चीन के फुजियान प्रांत के क्वानझोउ शहर में एक महिला के साथ ऐसा हादसा हुआ, जिसने सबको हैरान कर दिया। 48 साल की यह महिला, जिनका नाम किन है, रोज की तरह जंगल में टहलने गई थीं। घूमते-घूमते अचानक उनका पैर फिसला और वह एक पुराने, सुनसान और गहरे कुएं में जा गिरीं। यह कुआं काफी समय से वीरान पड़ा था और वहां कोई आता-जाता नहीं था। गिरने के बाद वह घंटों तक वहीं फंसी रहीं और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। तो आज की इस खबर में हम आपको इसी खबर के बारे में बताने जा रहे हैं।
बेहद अनोखी है घटना
परिवार वालों को जब वह घर नहीं लौटीं तो अगले दिन उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस को दी गई। रिपोर्ट मिलने के बाद बचाव दल ने खोजबीन शुरू की। इस खोज में थर्मल इमेजिंग वाले ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। ड्रोन की मदद से ही यह पता चला कि किन कुएं में फंसी हुई हैं। इसके बाद जिनजियांग रुइतोंग ब्लू स्काई आपातकालीन बचाव टीम ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
सांप से भरे कुएं में जा गिरी महिला
किन लगभग 54 घंटे से भी ज्यादा समय तक कुएं में फंसी रहीं। इस दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कुएं के अंदर बिल्कुल अंधेरा था, मच्छरों की भरमार थी और पानी में सांप तैर रहे थे। एक बार तो एक पानी का सांप उनके हाथ पर काट भी गया। किस्मत से वह सांप जहरीला नहीं था। वरना हालात और भी बिगड़ सकते थे। इतने लंबे समय तक पानी और अंधेरे में रहना किसी के लिए भी आसान नहीं होता, लेकिन किन ने हिम्मत नहीं हारी।
ऐसे बचाई अपनी जान
दरअसल, किन को तैरना आता था। यही वजह रही कि उन्होंने कुएं की दीवार में फंसे एक पत्थर को पकड़कर खुद को पानी के ऊपर बनाए रखा। अगर वह तैरना नहीं जानतीं तो शायद उनकी जान बचना मुश्किल हो जाता। लगातार दो दिनों से ज्यादा समय तक पानी में रहने की वजह से उनके हाथों में छाले पड़ गए और गंभीर चोटें आईं।
बचाव दल ने बचाई महिला की जान
बाद में बचाव दल ने आसपास की झाड़ियों को हटाकर कुएं तक रास्ता बनाया और किन को सुरक्षित बाहर निकाला। जब उन्हें बाहर निकाला गया तो वह थककर चूर हो चुकी थीं। उन्होंने बताया कि कुएं में रहते हुए कई बार उनका मन हार मानने का हुआ। लेकिन जैसे ही वह टूटने लगतीं, उन्हें अपने माता-पिता और बेटी की याद आ जाती। उनकी मां की उम्र 70 साल है और पिता की 80 साल। इसके अलावा उनकी बेटी अभी-अभी कॉलेज जाना शुरू की है। उन्होंने सोचा कि अगर वह हार मान लेंगी, तो उनका परिवार किसके सहारे जिएगा। यही सोचकर उन्होंने हर पल हिम्मत जुटाई और जिंदा रहने की कोशिश की।





