समय पर ही होंगे BCCI के चुनाव, 2027 विश्व कप तक के लिए खोजा जाएगा टीम का नया स्पॉन्सर

बीसीसीआई लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बने संविधान पर चलता है। जब तक नया कानून अधिसूचित नहीं हो जाता है तब तक उसे और उसके राज्य संघों को पुराने संविधान से ही चलना होगा। हाल ही में खेल मंत्रालय ने भी बीसीसीआई और उसके राज्य क्रिकेट संघों के चुनाव को लेकर स्थिति साफ की थी।

राष्ट्रीय खेल प्रशासन कानून बनने के बावजूद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को अगले महीने अपनी वार्षिक सभा कराने के साथ नए चुनाव भी कराने होंगे क्योंकि अभी यह कानून अधिसूचित नहीं हुआ है। भारत सरकार द्वारा संसद में पारित इस कानून को अधिसूचित होने में चार से पांच माह लग सकते हैं और तब तक बीसीसीआई के चुनाव को टाला नहीं जा सकता है।

अभी बीसीसीआई लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बने संविधान पर चलता है। जब तक नया कानून अधिसूचित नहीं हो जाता है तब तक उसे और उसके राज्य संघों को पुराने संविधान से ही चलना होगा। हाल ही में खेल मंत्रालय ने भी बीसीसीआई और उसके राज्य क्रिकेट संघों के चुनाव को लेकर स्थिति साफ की थी। मंत्रालय के अधिकारी ने भी कहा था कि जब तक नया बिल अधिसूचित हीं होता तब तक क्रिकेट से संबंधित संघ पुराने संविधान के आधार पर ही चलेंगे।

पुराने नियम से ही अभी हो सकते हैं चुनाव
अगर बीसीसीआई या किसी राज्य संघ के चुनाव होने हैं तो वो अभी चल रहे संविधान के हिसाब से उसे करवा सकते हैं। अभी उन पर लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें लागू रहेंगी। उसी के हिसाब से पदाधिकारी बनेंगे और हटेंगे। बिल के नोटिफाई होने के साथ उनको उसके हिसाब से चलना होगा। लोढ़ा समिति की सिफारिशों के तहत पदाधिकारियों की अधिकतम आयुसीमा 70 वर्ष है। भारत सरकार के नए कानून के अधिसूचित होने के बाद ऐसा नहीं होगा।

तब कोई भी व्यक्ति 70 साल से पहले चुने जाने पर अपना कार्यकाल पूरा कर सकेगा। मालूम हो कि बीसीसीआ और उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ सहित उसके कई राज्य संघों के चुनाव सितंबर में होने हैं। यही नहीं कई राज्य संघों के पदाधिकारियों को कुल नौ साल के कार्यकाल या लगातार छह साल के कार्यकाल के कारण हटना पड़ेगा। वे सोच रहे थे कि नए कानून से मिलने वाली राहत से वे बच जाएंगे। जब बीसीसीआइ के पदाधिकारी से ये पूछा गया तो उन्होंने कि जब बीसीसीआई अध्यक्ष रोजर बिन्नी को हटना पड़ गया तो बाकी राज्य संघों को भी ये मानना पड़ेगा।

एपेक्स कमेटी की बैठक में क्या हुआ
भारत सरकार संसद के मानसून सत्र में ऑनलाइन गेमिंग एवं विनियमन कानून भी लेकर आई जिसके बाद ड्रीम-11 जैसे एप्स बंदी की कगार पर आ गए हैं। इस कानून के आने के बाद ड्रीम-11 भारतीय क्रिकेट टीम का मुख्य प्रायोजक नहीं रहा। इसको लेकर बुधवार को बीसीसीआई की एपेक्स कमेटी की बैठक हुई। 19 जुलाई को 70 साल के होने के कारण बिन्नी को बीसीसीआई से हटना पड़ा था।

कार्यवाहक अध्यक्ष राजीव शुक्ला की अध्यक्षता में हुई बैठक में भारतीय टीम के ड्रीम-11 को लेकर चर्चा हुई। सूत्रों ने कहा कि बैठक में ड्रीम-11 के करार को रद करने और ढाई साल के लिए नया प्रायोजक खोजने को लेकर बातचीत हुई। एशिया कप में भारत को 10 सितंबर से मुकाबले खेलने हैं। ऐसे में तब तक नया प्रायोजक मिलने में मुश्किल होगी।

सूत्र ने कहा कि अब दो सप्ताह भी नहीं बचे हैं। हम प्रयास कर रहे हैं लेकिन नई निविदा निकालना, कानूनी प्रक्रिया का पालन करना और बाकी तकनीकि चीजों में समय लगता है। शार्ट टर्म यानी सिर्फ एशिया कप के लिए अलग प्रायोजक लाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि नहीं ऐसा नहीं करेंगे। हमाारा फोकस अगले ढाई साल तक यानी 2027 अक्टूबर-नवंबर में होने वाले वनडे विश्व कप तक के लिए प्रायोजक लाने पर है।

उन्होंने कहा कि इन गेमिंग कंपनियों को लग रहा था कि केंद्र सरकार 40 फीसद तक टैक्स लगा लेगी। इन्हें ये अनुमान नहीं था कि सरकार इतनी जल्दी कानून ले आएगी। दलीप ट्रॉफी के मैचों का प्रसारण नहीं होने पर बीसीसीआई के सूत्रों ने कहा कि इसको लेकर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। पता किया जाएगा ऐसा क्यों हुआ?

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