आवेदन का झंझट न जांच की टेंशन, 60 की उम्र पार करते ही शुरू हो जाएगी वृद्धावस्था पेंशन

वृद्धावस्था पेंशन के लिए अब पात्रों को भटकना नहीं पड़ेगा। आवेदन का झंझट होगा न दस्तावेज मुहैया कराने पड़ेंगे। जांच की भी टेंशन नहीं होगी। 60 साल से अधिक उम्र वालों को स्वत: पेंशन मिलेगी। यह सब होगा फैमिली आईडी, जनसुविधा केंद्र व अन्य डाटा से। डाटा के आधार पर ही पात्रों का चयन होगा।

समाज कल्याण विभाग ने इस नवाचार को अभी पायलेट प्रोजेक्ट की तरह शुरू किया है। वृद्धावस्था पेंशन में यह नवाचार सफल रहा तो विधवा, दिव्यांगजन पेंशन के अलावा अन्य सरकारी योजनाओं में भी इसे लागू किया जाएगा। इससे एक तरफ अपात्रों को पात्र बनाने का खेल रुकेगा। दूसरी तरफ लाभर्थियों की कागजी औपचारिकताएं कम होंगी।

जिले में 73 हजार वृद्धावस्था पेंशन लाभार्थी हैं। करीब 10 हजार से अधिक लोग पेंशन से वंचित भी हैं। किसी के पास आय प्रमाणपत्र नहीं तो किसी का आधार गलत है। किसी का खाता आधार से लिंक नहीं है तो कोई कम शिक्षित है। ऐसे में इन सभी के लिए यह पहल वरदान साबित हो सकती है।

घर जाकर पूछेगी टीम, लाभ लोगे या नहीं
समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण की इस पहल को अंजाम तक पहुंचाने के लिए जिला स्तर पर एक टीम बनाई जाएगी। इसमें तकनीकी जानकार शामिल होंगे जो डाटा का सत्यापन कर पात्रों को चिह्नित करेंगे। फिर उनके घर जाकर उनसे योजना का लाभ लेना है या नहीं के संबंध में सहमति लेंगे।

लेखपालों की मनमानी पर भी लगेगी रोक
पेंशन योजनाएं आय पर आधारित हैं। लाभार्थी को आय प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना पड़ता है। जिनकी सालाना आय 46 हजार रुपये से कम है, उन्हें ही लाभ मिलता है। ऐसे में लेखपाल पात्रता के लिए कई बार अपात्रों का आय प्रमाण पत्र बना देते हैं। इस नवाचार से लेखपालों की मनमानी पर रोक लगेगी। डाटा में प्रदर्शित आय के आधार पर ही लाभार्थी को चिह्नित किया जाएगा।

वास्तविक लोगों को ही मिलेगा लाभ
जिला समाज कल्याण अधिकारी घासीराम प्रजापति ने बताया कि फैमिली आईडी व अन्य डाटा के आधार पर लाभर्थियों का चयन होगा। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस नवाचार को शुरू किया है। सफल रहा तो अन्य योजनाओं में भी इसे लागू किया जाएगा।

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