यूरोपीय आयोग की प्रेसीडेंट पहुंचीं भारत, आज पीएम मोदी के साथ करेंगी वार्ता
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यूरोपीय आयोग की प्रेसीडेंट उर्सला वोन डेर लेयेन गुरुवार को अपनी बहुप्रतीक्षित दो दिवसीय भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंच गईं। उनके साथ यूरोपीय आयोग के 22 देशों के आयुक्त भी भारत आ रहे हैं। यह पहला मौका है, जब 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ के इतने सारे देशों के आयुक्त एक साथ किसी देश की यात्रा पर हैं। इससे यह पता चलता है कि यूरोपीय संघ भारत के साथ अपने संबंधों को कितना महत्व दे रहा है।
आज द्विपक्षीय शिखर वार्ता होगी
पीएम नरेन्द्र मोदी और प्रेसीडेंट उर्सला लेयेन की अध्यक्षता में 28 फरवरी को द्विपक्षीय शिखर वार्ता होगी। कूटनीतिक विशेषज्ञ इन दोनों की वार्ता को उसी दिन कुछ घंटों के अंतराल पर अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेंस्की के बीच होने वाली बैठक से जोड़कर देख रहे हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप यूक्रेन-रूस युद्ध में यूरोपीय देशों की मदद करने की अमेरिकी नीति को पूरी तरह से बदलते हुए अब रूस के साथ खड़े होते दिख रहे हैं। इससे यूरोपीय संघ के लिए भारत के साथ संबंधों का महत्व काफी बढ़ गया है।
भारत व ईयू आपसी रणनीतिक संबंधों के अगले पांच वर्षों का रोडमैप जारी करेंगे
शुक्रवार को पीएम मोदी और प्रेसीडेंट उर्सला की अगुवाई में होने वाली बैठक को लेकर यूरोपीय संघ और भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से जो जानकारी दी गई है उसके मुताबिक कारोबार, रक्षा, प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों से जुड़े अहम मुद्दों पर बात होगी। भारत व ईयू आपसी रणनीतिक संबंधों के अगले पांच वर्षों का रोडमैप जारी करेंगे।संभवत: इसे रोडमैप 2030 के नाम से जारी किया जाएगा। मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर दोनों के बीच विमर्श जारी है, जिसे फिर से शुरू करने पर सहमति बनेगी। हालांकि, एफटीए को लेकर किसी बड़ी घोषणा की संभावना नहीं है।
यूरोपीय संघ के निर्यात पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की संभावना
वजह यह बताया गया है कि अमेरिका की नई शुल्क नीति के असर का दोनों पक्ष अभी आकलन करेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने 26 फरवरी को यह घोषणा की है कि वह शीघ्र ही यूरोपीय संघ से आने वाले उत्पादों पर 25 प्रतिशत का शुल्क लगाने जा रहे हैं। इससे यूरोपीय संघ के निर्यात पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की संभावना है।ईयू के एक वरिष्ठ राजनयिक ने स्वीकार किया कि अमेरिका की नई टैरिफ नीति से अपने हितों की सुरक्षा के लिए यूरोपीय देशों को चीन व भारत की जरूरत होगी। साथ ही ईयू कारोबार व आर्थिक तौर पर पूरी तरह से चीन पर भी नहीं निर्भर रहना चाहता। इसलिए, भारत के साथ संबंधों को नए उत्साह के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।
सीडेंट उर्सला की भारत यात्रा का वैश्विक महत्व
ईयू के सदस्य स्वीडन के नई दिल्ली में राजदूत जान थेसीफ ने दैनिक जागरण को बताया कि जिस तरह से वैश्विक समीकरण बदल रहे हैं, उसे देखते हुए प्रेसीडेंट उर्सला की भारत यात्रा का वैश्विक महत्व है। भारतीय पीएम के साथ उनकी होने वाली बातचीत द्विपक्षीय रिश्तों को बहुत ही व्यापक बनाने में मददगार साबित होगी।
ईयू की मांग
यूरोपीय देशों के शराब व कारों पर आयात शुल्क घटाया जाएकृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोले जाएंपर्यावरण अनुकूल उत्पादों के निर्माण पर ज्यादा ध्यान दें
भारत की मांग
भारतीयों को काम करने की ज्यादा आजादी मिलेप्रौद्योगिकी हस्तांतरण की प्रक्रिया को आसान होस्टील जैसे धातुओं के निर्यात को पर्यावरण सुरक्षा से न जोड़ें