एक बार फिर थम गए हरियाणा रोडवेज के पहिए, यात्री भुगत रहें परेशानी


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रोडवेज कर्मचारी नेता दलबीर किरमारा एवं रमेश सैनी ने कहा कि मंगलवार के चक्का जाम के बाद भी सरकार की आंखें नहीं खुली तो ज्वाइंट एक्शन कमेटी आगामी रणनीति तय करेगी। जिसमें 18 जून को परिवहन मंत्री के कैंप कार्यालय का घेराव व 9 जुलाई को करनाल में सीएम के कैंप कार्यालय का घेराव करेंगे।
अगर मंगलवार के दिन घर से यात्रा की मजबूरी हो तो ट्रेन का विकल्प अपना सकते हैं। बसों की हड़ताल के कारण यहां भी भीड़ अधिक रहेगी। फिर भी आप अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। ट्रेन का टाइम शेडयूल जानकर कार्यक्रम बना सकते हैं।
प्राइवेट बसें, ओमनी और क्रूजर के भरोसे होंगे यात्री
रोडवेज बसें नहीं चलने से यात्री कुछ प्राइवेट बसों को सहारे ही सफर करने पर मजबूर होंगे। ये बसें डिपो परिसर में नहीं आकर बस अड्डे के बाहर और बहुअकबरपुर बाइपास से निकलेंगी। इसके अलावा दिल्ली सहित आसपास के क्षेत्रों सोनीपत, जींद, गोहाना, सांपला और झज्जर के लिए ओमनी और क्रूजर यात्रियों का सहारा बनेंगे।
पिछले तीन सालों में रोडवेज बेड़े में घटी हैं बसें
इंटक यूनियन के महासचिव महावीर मलिक ने बताया कि सरकार प्राइवेट बसों को चलाने पर आमादा है। जींद, हिसार और कुरुक्षेत्र जैसे डिपो में नई नीति के तहत प्राइवेट बस चलाए जाने से कर्मचारियों में रोष है। प्रदेश सरकार के सत्ता में आने के बाद रोडवेज के बेड़े में बसें बढ़ने के बजाय घटी हैं। उन्होंने कहा कि प्राइवेट बसों की परमिट नीति आमजन के खिलाफ है।





