इजरायल के हवाई हमले में मारा गया हमास नेटवर्क का प्रमुख

इजरायल और हमास के बीच जंग में हमास के ज्यादातर कमांडर मारे गए हैं। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि कब्जे वाले वेस्ट बैंक में तुल्कर्म शरणार्थी शिविर पर इजरायली हमले में 18 फिलिस्तीनी मारे गए। इजराइली सेना ने एक बयान में कहा कि उसकी वायु सेना ने एक हमले में तुल्कर्म में हमास नेटवर्क के प्रमुख को मार गिराया है।

वहीं इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने गुरुवार रात को घोषणा की कि वेस्ट बैंक के तुल्कर्म में हमास नेटवर्क के प्रमुख जही यासर अब्द अल-रजेक औफी को मार गिराया। आईडीएफ ने एक बयान में कहा कि औफी ने दो सितंबर को एटरेट में कार-बमबारी हमले की योजना बनाई और उसका नेतृत्व किया था।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी अपनी भूमिका के तहत वेस्ट बैंक क्षेत्र में बड़ी संख्या में हमास आतंकवादियों को हथियार की आपूर्ति की। वेस्ट बैंक की तरफ से इजरायल के समुदायों की ओर अतिरिक्त हमलों की योजना बनाई और उनका नेतृत्व किया था।

हमास नेटवर्क के प्रमुख का कर दिया सफाया

बयान में कहा गया है कि ओफी ने वेस्ट बैंक में इजरायलियों के खिलाफ कई हमलों की योजना बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने में भाग लिया, उसने हमास नेटवर्क को मजबूत करने और महत्वपूर्ण गोलीबारी हमलों और कार बम विस्फोटों को अंजाम देने में क्षेत्र में अतिरिक्त आतंकवादियों की सहायता करने के लिए काम किया।

इजरायली सेना ने अपने बयान में कहा कि अब औफी दुनिया को कभी परेशान नहीं कर पाएगा। क्योंकि उसके साथ-साथ, कई अन्य महत्वपूर्ण आतंकवादी जो तुल्कर्म में नेटवर्क का हिस्सा थे, उनका सफाया कर दिया गया है

ईरान को करारा जवाब देने की तैयारी में इजरायली सेना

ईरान ने मंगलवार रात को इजरायल को निशाना बनाकर लगभग 200 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया हालांकि हमले ज्यादा सटीक नहीं थे। वहीं, अब इजरायल भी पलटवार करने की तैयारी में है। तेल अवीव के घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि इजरायल कथित तौर पर कुछ ही दिनों में बहुत महत्वपूर्ण जवाबी कार्रवाई करेगा।

तेल उत्पादक या बिजली संयंत्रों में निशाना बना सकता है इजरायल

इजरायल संभवतः ईरान की प्रमुख तेल उत्पादक संयंत्रों को निशाना बनाएगा या ईरान के प्रमुख बिजली संयंत्रों पर हमला भी कर सकता है। यदि वास्तव में ऐसा होता है, तो यह अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण पहले से ही तनावग्रस्त ईरान की अर्थव्यवस्था को करारा झटका देगा, साथ ही इसके बुनियादी ढांचे और ऊर्जा सुरक्षा को भी झटका देगा। इज़राइल आगे चलकर ईरान के अन्य रणनीतिक स्थानों को भी निशाना बना सकता है।

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