विंटर गेम्स : ब्लेड पर संतुलन बनाकर चमक रही स्कर्मा रिनचेन

2017 में गांव में आइस हॉकी प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान स्कर्मा रिनचे ने पहली बार आइस-स्केटिंग बूट देखे। इन्हें पहनकर ब्लेड पर खड़े होकर संतुलन बना पाना भी काफी चुनौतीपूर्ण था। धीरे-धीरे चलना सीखा और फिर लगातार अभ्यास के साथ रिनचेन आइस हॉकी के खेल में परिपक्व होती गई।

लेह में महिला संघ द्वारा आयोजित 15 दिवसीय कार्यशाला में भाग लेने से उनकी कहानी आगे बढ़ी। वहां, स्कर्मा रिनचेन ने भारतीय महिला राष्ट्रीय आइस हॉकी टीम की खिलाड़ियों के साथ से मुलाकात की और नियमित उनके साथ अभ्यास सत्र में भाग लिया। अंततः उन्हें उनके साथ प्रशिक्षण लेने का मौका मिला। फिर 2023 में लेफ्ट फॉरवर्ड स्कर्मा खुद एक राष्ट्रीय टीम की खिलाड़ी बन गईं।

आइस हॉकी खिलाड़ी स्कर्मा रिनचेन लद्दाख के छोटे से अर्ध जनजातीय गांव ग्या मेरु की रहने वाली हैं। उनका यह सफर प्रेरणादायक है, जो दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत की परिवर्तनकारी शक्ति को प्रदर्शित करता है।

राष्ट्रीय आइस हॉकी टीम के साथ ही स्कर्मा मैरील स्पामो लेह स्क्वायड का भी हिस्सा थी, जिसने रॉयल एनफील्ड आइस हॉकी लीग में स्वर्ण पदक जीता था। इस चैंपियनशिप को इस साल जनवरी में लद्दाख में आयोजित किया गया। स्कर्मा लद्दाख महिला टीम का हिस्सा भी रहीं, जिन्होंने काजा (हिमाचल प्रदेश) में राष्ट्रीय आइस हॉकी चैंपियनशिप 2024 में रजत पदक जीता।

पहली बार अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में कृत्रिम रिंक से हुआ सामना

स्कर्मा बताती हैं कि उनका पहला अंतरराष्ट्रीय पदार्पण थाईलैंड में 2023 आईआईएचएफ महिला एशिया और ओशिनिया चैम्पियनशिप में हुआ। यहां भारत को ईरान से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन युवा लद्दाखी खिलाड़ी के यह क्षण यादगार रहे।

उन्होंने कहा, ‘मैं अपने पहले अंतरराष्ट्रीय खेल से पहले घबराई हुई थी। एक कृत्रिम रिंक एक ऐसी चीज थी जिसके अस्तित्व के बारे में मुझे कभी नहीं पता था क्योंकि मैंने केवल प्राकृतिक रिंक ही देखा था। जब मैंने कोर्ट पर कदम रखा तो लंबी युवतियां और उनके गियर डराने वाले लग रहे थे। यह जबरदस्त था, लेकिन हम सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रहे।

ईरान से हारने के बाद भारतीय महिलाओं ने किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान और मलेशिया को हराया। सेमीफाइनल में भारत थाईलैंड से हार गया। आखिरकार फाइनल में थाईलैंड ने ईरान को हराकर स्वर्ण पदक जीता।

स्कर्मा ने कहा कि आइस हॉकी एक शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण खेल है। चोट लगने पर कई बार हम हार मान लेते हैं, लेकिन खुद पर विश्वास और कड़ी मेहनत से इसमें महारत हासिल की जा सकती है।

2017 में स्केट्स पर संघर्ष करने से लेकर 2023 में राष्ट्रीय आइस हॉकी टीम में जगह बनाने तक स्कर्मा की यात्रा, दृढ़ता के पुरस्कारों को रेखांकित करती है।

स्कर्मा खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2024 के महत्व को पहचानती है क्योंकि चौथे संस्करण में पहली बार महिला टीमों का स्वागत किया गया है। वह कहती हैं कि वह ‘अपने घरेलू मैदान पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए उत्साहित हैं, मेरा मानना है कि यह राष्ट्रीय स्तर का आयोजन बाधाओं को तोड़ेगा और देश भर में महिला एथलीटों के लिए अधिक अवसर पैदा होंगे।’

स्कर्मा आइस हॉकी को सिर्फ एक खेल से कहीं अधिक देखती हैं, इसके परिवर्तनकारी प्रभाव को स्वीकार करती हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी भागीदारी एक सपना था जो आइस-हॉकी के बिना संभव नहीं थी।

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