दुनिया का सबसे जहरीला पक्षी, भूलकर भी न लगाएं हाथ!

हमने जहरीले सांपों और जहरीले मेंढकों के बारे में सुना है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जहरीले पक्षी भी होते हैं. आज हम आपको एक ऐसे जहरीले पक्षी के बारे में बताएंगे, जिसे दुनिया का सबसे जहरीला पक्षी माना जाता है. इस पक्षी का नाम हूडेड पिटोहुई है, जिसे छूने का मतलब मौत को दावत देने जैसा है, क्योंकि पंखों को छूने मात्र से आपके हाथों को ऐसा महसूस हो सकता है कि जैसे उनमें आग लगी हो और संभवतः शरीर में इसका घातक जहर भी फैल सकता है, जो पैरालायसिस और यहां तक कि मृत्य का भी कारण बन सकता है, इसलिए भूलकर भी इस पक्षी को हाथ नहीं लगाना चाहिए.

a-z-animals.com की रिपोर्ट के अनुसार, हूडेड पिटोहुई न्यू गिनी में पाया जाने वाला एक सॉन्गबर्ड है, जिसका साइंटिफिक नाम पिटोहुई डाइक्रोस है. न्यू गिनी एक द्वीप है, जो इंडोनेशिया के पूर्व में दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित है. पिटोहुई की लगभग छह प्रजातियां हैं, जिनमें से हूडेड पिटोहुई सबसे घातक है. यह दस्तावेज में दर्ज होने वाला पहला जहरीला पक्षी है. हूडेड पिटोहुई का पेट ईंट-लाल रंग का होता है, जबकि इसके सिर, पंख और पूंछ काले रंग की होती है. इसके मजबूत पैर और शक्तिशाली चोंच होती है.

पक्षी के बारे में कैसे चला पता?

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा ‘सबसे जहरीला पक्षी’ घोषित, इसकी खोज 1989 में जैक डंबाचर ने की थी, जो न्यू गिनी में पक्षियों के लिए जाल बिछा रहे थे. जाल में हूडेड पिटोहुई पक्षी का एक जोड़ा फंस गया. जब डंबाचर ने उनमें से एक को पकड़ने की कोशिश की, तो उसने उनकी एक उंगली पर काट लिया. जब उन्होंने अपनी चोट लगी उंगली को चूसकर सहलाया, तो उसे यह जानकर घबराहट हुई कि उनकी जीभ और होंठ सुन्न हो गए थे.

पाया जाता है कौन सा जहर?

हूडेड पिटोहुई की स्किन, पंख और अन्य ऊतकों में बैट्राकोटॉक्सिन (Batrachotoxin) नामक न्यूरोटॉक्सिन पाया जाता है, जो प्रकृति में पाया जाने वाला एक अत्यधिक विषैला यौगिक है, जो पैरालायसिस और मृत्यु का कारण बनता है. इस पक्षी की स्किन और पंख उसके शरीर के सबसे जहरीले पार्ट हैं. इसकी चोंच से एक खरोंच या तेज प्रहार लोगों को सुन्न कर सकती है. अगर इस जहर की अधिक मात्रा उनके शरीर में चली जाए, तो इससे लकवा हो सकता है और संभवतः मृत्यु भी हो सकती है. इस पक्षी को नहीं खाने की सलाह भी दी जाती है.

क्यों जहरीली होते हैं ये पक्षी?

ये पक्षी बैट्राकोटॉक्सिन यौगिक को खुद नहीं बनाते हैं, बल्कि वे इसे अपने आहार से प्राप्त करते हैं. ये आम तौर पर उन जानवरों और पौधों से जहर इकट्टा करते हैं, जिन्हें वे खाते (खासकर जहरीले कीड़ों से) हैं. न्यू गिनी के जंगलों में भृंग (Beetles) एक संभावित स्त्रोत हैं. इस पक्षी की स्किन और पंख और अन्य ऊतकों का जहरीला होना इसे शिकारियों से बचाता है.

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