छात्रों की उम्र को लेकर सरकार के फैसले के बाद संचालकों में खलबली

दिल्ली में नियमों को अनदेखी करने वाले कोचिंग संस्थानों पर बंदी की तलवार लटकी हुई है। दिल्ली के कोचिंग हब में इस तरह के कोचिंग सेंटरों की भरमार है। दिल्ली पुलिस का एक सर्वे भी इसकी गवाही देता है।

केंद्र सरकार की ओर से कोचिंग संस्थानों के लिए जारी दिशा-निर्देश के बाद कई संचालक सकते में हैं। दिल्ली के मुखर्जी नगर, करोल बाग, लक्ष्मी नगर, कालू सराय सरीखे बड़े कोचिंग हब में शुक्रवार इस मसले पर चर्चा होती रही। कोचिंग संचालक दिनभर नफा-नुकसान पर गुणा-गणित करते दिखे। नियमों को अनदेखी करने वाले कोचिंग संस्थानों पर बंदी की तलवार लटकी हुई है।

दिल्ली के कोचिंग हब में इस तरह के कोचिंग सेंटरों की भरमार है। दिल्ली पुलिस का एक सर्वे भी इसकी गवाही देता है। उधर, जानकार मानते हैं कि ऑनलाइन कोचिंग में नए सिरे से उछाल आ सकता है। दिशा-निर्देश इस पर चुप हैं। जबकि दसवीं तक के बच्चों का कोचिंग का बहुत बड़ा बाजार है। दिशा-निर्देशों का का सख्ती से पालन होने से दसवीं तक की कोचिंग पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से चलेगी। वहीं, कक्षाओं के मानक पूरा करने से बचने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने वाली कोचिंग भी इसी माध्यम पर जोर देर सकती हैं।

अभिभावक एकमत नहीं
दूसरी तरफ, अभिभावक इस मसले पर एकमत नहीं हैं। कोचिंग छोड़ने पर फीस वापसी और बच्चों के सुरक्षा इंतजामों से जुड़े प्रावधानों की तो सभी ने तारीफ की। असमंजस 16 साल से कम उम्र तक के बच्चों के लिए कोचिंग क्लास की बंदिश पर दिखा। अभिभावकों का मानना है कि स्कूलों की पढ़ाई के खराब स्तर और बेहतर भविष्य के लिए उनको बच्चों को कोचिंग भेजना पड़ता है। नए नियमों से बच्चों की पढ़ाई खराब हो सकती है। बता दें कि बृहस्पतिवार केंद्र सरकार ने कोचिंग सेंटर के गाइड लाइन जारी की है। इसमें बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने समेत दूसरे कई प्रावधान हैं। 

फैसला अच्छा, लेकिन सुधरे स्कूली शिक्षा
द स्टडी कोचिंग इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर मणिकांत सिंह बताते हैं कि फैसला सही दिशा में उठाया गया कदम है। छोटे बच्चों पर स्कूल व कोचिंग की पढ़ाई का दबाव नहीं होना चाहिए। लेकिन बुधवार जारी असर की रिपोर्ट पर भी गौर कीजिए। इसके मुताबिक, 18 साल तक के करीब एक चौथाई बच्चे कक्षा दो की पुस्तकें नहीं पढ़ पाते। स्कूल 40 फीसदी तक पाठ्यक्रम पूरा नहीं कर रहे हैं। ऐसे में मजबूरन बच्चाें को कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है। जरूरी है कि सरकार स्कूल की शिक्षा व्यवस्था को भी बेहतर करे। दूसरी तरफ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने वाले संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा तो सुनिश्चित होनी चाहिए।

अभिभावक व बच्चे बोले
कोचिंग के लिए यह नियम बहुत जरूरी हैं, अभी उनका बेटा 11वीं कक्षा में पढ़ता है। वह नीट की परीक्षा के लिए अभी से कोचिंग ले रहा है। वह जिस कोचिंग में पढ़ता है, वहां जो पढ़ाया उसे जा रहा, वे अधिक समझ नहीं आ रहा है। लेकिन, पूरे वर्ष की फीस जमा की जा चुकी है। कोचिंग संस्थान फीस वापस नहीं करने से उसकी मजबूरी है कि वह वहीं पढ़ रहा है। इस नियम के तहत उन्हें उनकी बकाया फीस मिल सकती है। -उत्तम नगर में रहने वाली अभिभावक रोशनी सिंगला

उनकी बेटी 9वीं कक्षा की छात्रा है। उसे भविष्य में डॉक्टर बनना है, लेकिन उसके लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी अभी से करानी है। फिर, बड़े स्कूल बच्चों पर स्कोर करने का दबाव बनाते हैं। ऐसे में उनको कोचिंग में डालना पड़ता है। नए नियम तो ठीक हैं, लेकिन स्कूल की पढ़ाई भी बेहतर होनी चाहिए। जिससे बच्चों को कोचिंग दिलवानी ही न पड़े। -द्वारका में रहने वाली अभिभावक सुनीता चौहान

हर कोई सबसे आगे रहना चाहता है। अगर कोई छात्र स्कूल की पढ़ाई के साथ कोचिंग में पढ़ाई करना चाहता है, तो उसके लिए नियम होने जरूरी हैं। मैं दसवीं में हूं और जिस कोचिंग संस्थान में जाता हूं, वहां अवकाश के दिन भी कक्षा के लिए बुला लेते हैं। ऐसे में कई बार वह आराम भी नहीं कर पाते। -रोहिणी के छात्र सुशांत

आठवीं कक्षा के बाद ज्यादातर छात्रों को पता चल जाता है कि उन्हें आगे क्या करना है। ऐसे में वे कोचिंग सेंटर जाकर अपने सपनों की तैयारी करते हैं। लेकिन, अब वे ऐसा नहीं कर पाएंगे। इसके लिए उन्हें नहीं लगता है ऐसा करना बिल्कुल भी ठीक है। -मौजपूर की आंचल पांडेय

पुलिस की रिपोर्ट : अधिकतर के पास फायर एनओसी नहीं 
बीते दिनों दिल्ली अग्निशमन विभाग ने मुखर्जी नगर, करोलबाग, लक्ष्मी नगर,जनकपुरी, कालू सराय और साउथ एक्सटेंशन के 461 कोचिंग सेंटर का सर्वे किया था। इसमें से एक भी कोचिंग सेंटर ऐसा नहीं मिला, जिसमें आग से सुरक्षा के सटीक इंतजाम हों। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने इसी तरह की एक रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की थी। इसमें बताया गया कि 583 कोचिंग सेंटर में से सिर्फ 67 के पास फायर एनओसी है। अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली के अधिकतर कोचिंग सेंटर 15 मीटर से कम की ऊंची इमारतों में हैं। इसमें से कई आवासीय हैं। ज्यादातर में आग से बचाव का इंतजाम नहीं है। इन इमारतों की सीढ़ियां संकरी हैं। आपातकालीन द्वार नहीं है। क्षमता के हिसाब से प्रवेश और निकासी मार्ग भी संकरा है। आग से बचाव के उपकरण भी नहीं है।

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