कौन सा तेल खाते हैं जापानी लोग? क्यों माना जाता है सेहत के लिए वरदान

जापानी लोग सबसे लंबी उम्र तक जीते हैं. आप जानकर हैरान होंगे कि वहां तकरीबन 2 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनकी उम्र 100 साल से भी ज्यादा है. जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में ऐसा नहीं है. इसके पीछे की वजह जापानी लोगों का खानपान, उनकी लाइफस्टाइल को माना जाता है. आखिर ये लोग ऐसा क्या खाते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा दिन तक जिंदा रहते हैं? भारत समेत दुनिया लगभग सभी मुल्कों में कहा जाता है कि फलां तेल मत खाओ, इससे कोलेस्ट्रॉल होगा. बीपी ज्यादा होगा. ऐसे में एक अहम सवाल है क्या जापानी लोग कोई तेल नहीं खाते? जापान में लोग आखिर किस तेल में खाना पकाते हैं? आइए जानते हैं.
खाना पकाने के लिए दुनियाभर में कई तरह के तेल मौजूद हैं. नारियल से लेकर जैतून, सरसों तेल, तिल का तेल, कैनोल ऑयल और एवोकाडो से लेकर रेपसीड तक, लेकिन इतना विरोधाभास है कि हमें पता ही नहीं चलता कि सही तेल कौन सा है. सेहत के लिए सबसे अच्छा तेल किसे माना जाए. हाल के वर्षों में लोग नारियल का तेल ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं. क्योंकि इनका मानना है कि इसमें लगभग 90% संतृप्त वसा है. यह ट्रेंडी सुपरफूड बन गया है. इसके शरीर में वसा के रूप में जमा होने की संभावना कम है और ऊर्जा के रूप में खर्च होने की अधिक संभावना है. लेकिन हाल ही में आए हार्वर्ड विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट में इसे शुद्ध जहर बता दिया गया. ऐसे में सबसे अहम सवाल है कि आखिर कौन सा तेल इस्तेमाल किया जाए?
जवाब एक नहीं…
क्या जापानी लोग जो तेल इस्तेमाल करते हैं, वह सबसे सेफ है. सबूत भी है क्योंकि वहां लोग लंबी उम्र तक जीते हैं. उन्हें हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल जैसी दिक्कतें भी उतनी ज्यादा नहीं होतीं. आखिर जापानी लोग कौन सा तेल इस्तेमाल करते हैं? जवाब एक नहीं है. वहां तिल का तेल लगभग हर किचन में आपको दिख जाएगा. जैतून के तेल में भी कुछ लोग खाना पकाना पसंद करते हैं. लेकिन अधिकांश जापानी परिवार रेपसीड ऑयल या कैनोला ऑयल में खाना बनाना पसंद करते हैं.
रेपसीड ऑयल स्वास्थ्य के लिए वरदान
रेपसीड ऑयल को स्वास्थ्य के लिए वरदान माना जाता है. क्योंकि इसमें फैटी एसिड की मात्रा काफी संतुलित होती है. इसे सफेद सरसों का तेल भी कहते हैं, क्योंकि इसका सफेद बीज सरसों की तरह होता है. इसमें इरुबिक एसिड की मात्रा काफी कम पाई जाती है, जो हमें बीमारियों से बचाने में मदद करती है. इसमें फैटी एसिड की बनावट ऐसी होती है कि शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाती. इसे सभी अन्य तेलों की तुलना में पौष्टिक और हल्का तेल माना जाता है. यह गर्म करने के प्रति प्रतिरोधी होता है. इसलिए, इसका उपयोग तलने और तले हुए खाद्य पदार्थों के लिए किया जाता है.





