भद्रावास योग में दिया जाएगा उगते सूर्य देव को अर्घ्य

धार्मिक मान्यता है कि छठ पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। नविवाहित महिलाएं संतान प्राप्ति हेतु छठ करती हैं। ज्योतिषियों की मानें तो छठ पूजा पर भद्रा वास योग बन रहा है। इस योग में ही उगते सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाएगा। इस योग में सूर्य देव की उपासना करने से व्रती को अक्षय फल की प्राप्ति होगी।

लोक आस्था का महापर्व छठ देशभर में उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व सूर्य देव को समर्पित होता है। छठ महापर्व में उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि छठ पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। नविवाहित महिलाएं संतान प्राप्ति हेतु छठ करती हैं। ज्योतिषियों की मानें तो छठ पूजा पर भद्रा वास योग बन रहा है। इस योग में ही उगते सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाएगा। इस योग में सूर्य देव की उपासना करने से व्रती को अक्षय फल की प्राप्ति होगी। आइए, शुभ योग, सूर्योदय समय और पंचांग जानते हैं-

ध्रुव योग
ज्योतिषियों की मानें तो छठ पूजा के चौथे दिन ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का निर्माण शाम 08 बजकर 35 मिनट तक है। इस योग में सूर्य देव की उपासना करने से सुख और समृद्धि में अपार वृद्धि होती है।

भद्रावास योग
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर भद्रा वास का योग निर्माण हो रहा है। ज्योतिषियों की मानें तो आज सुबह 10 बजकर 07 मिनट तक भद्रा पाताल लोक में रहेंगी। इस दौरान पूजा उपवास करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 47 मिनट पर

सूर्यास्त – शाम 17 बजकर 26 मिनट पर

चंद्रोदय- दोपहर 01 बजकर 02 मिनट पर

चंद्रास्त- देर रात 12 बजकर 15 मिनट पर

पंचांग
ब्रह्म मुहूर्त – 05 बजे से 05 बजकर 54 मिनट तक

विजय मुहूर्त – दोपहर 01 बजकर 53 मिनट से 02 बजकर 35 मिनट तक

गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 26 मिनट से 05 बजकर 52 मिनट तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 11 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक

अशुभ समय
राहु काल – सुबह 08 बजकर 07 मिनट से 09 बजकर 27 मिनट तक

गुलिक काल – दोपहर 01 बजकर 26 मिनट से 02 बजकर 46 मिनट तक

दिशा शूल – उत्तर

ताराबल

अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती

चन्द्रबल

मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुंभ, मीन

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