मानसिक पीड़ा से मिलेगा छुटकारा, करें चंद्रमा के मंत्रों का जाप

चंद्र ग्रह को मन का स्वामी कहा जाता है जिसकी कुंडली में चंद्रमा अनुकूल स्थिति में हो तो उसे कभी मानसिक पीड़ा से नहीं गुजरना पड़ता है। साथ ही मां के साथ उस व्यक्ति के संबंध काफी अच्छे रहते हैं। लेकिन अगर वही चंद्रमा अगर कुंडली में अशुभ स्थान पर है तो जातक को काफी बुरे दौर से गुजरना पड़ता है।
चंद्र देव हर व्यक्ति की कुंडली को प्रभावित करने वाले सबसे महत्वपूर्ण ग्रहों में से एक हैं। चंद्र ग्रह को मन का स्वामी कहा जाता है, जिसकी कुंडली में चंद्रमा अनुकूल स्थिति में हो, तो उसे कभी मानसिक पीड़ा से नहीं गुजरना पड़ता है। साथ ही मां के साथ उस व्यक्ति के संबंध काफी अच्छे रहते हैं। लेकिन अगर वही चंद्रमा अगर कुंडली में अशुभ स्थान पर है, तो जातक को काफी बुरे दौर से गुजरना पड़ता है।
अगर आप चंद्र ग्रह के अशुभ परिणामों से बचना चाहते हैं, तो आपको यहां दिए उनके मंत्रों का जाप नियम अनुसार करना चाहिए।
चंद्र देव के मंत्र
ॐ शीतांशु, विभांशु अमृतांशु नम:
श्वेतः श्वेताम्बरधरः श्वेताश्वः श्वेतवाहनः।
गदापाणि द्विर्बाहुश्च कर्तव्योः वरदः शशिः।।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं ॐ स्वाहा:
इस विधि से करें चंद्र देव के मंत्रों का जाप
सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें।
भगवान चंद्र की प्रतिमा के सामने उनके मंत्रों का जाप करें।
इसके लाभों को बढ़ाने के लिए मंत्र का अर्थ समझें।
चंद्र मंत्र के जाप से नकारात्मक प्रभावों को सकारात्मकता में बदला जा सकता है।
चंद्र मंत्र का जाप करने का सही समय शुक्ल पक्ष सोमवार का दिन है।
चंद्र मंत्र का जाप कम से कम 18 माला या 108 बार करना चाहिए है।
चंद्र मंत्र के लाभ
चंद्रमा मन के देवता हैं। चंद्र मंत्र का जाप करने से मन की उलझनें दूर होती हैं और मन की शक्ति तीव्र गति से बढ़ती है। भगवान चंद्र की पूजा से सौंदर्य, प्रति दृष्टि, स्मृति और मानसिक क्षमता बढ़ती है। नियमित रूप से चंद्र मंत्र का जाप करने से नकारात्मक प्रभावों को आसानी से कम किया जा सकता है। साथ ही कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को सकारात्मक परिणामों में बदला जा सकता है।





