मुंबई : दिवाली में पटाखे फोड़ने के लिए निर्देश किए जारी

बीएमसी का कहना है कि दिवाली पर रात आठ बजे से रात 10 बजे के बीच ही सिर्फ पटाखे फोड़े जा सकते हैं। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए फैसले का कड़ाई से पालन आवश्यक है।
दिवाली पर इस वर्ष भी प्रदूषण का साया मंडरा रहा है। इस बीच, हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार बीएमसी ने एक बड़ा फैसला लिया है। बीएमसी का कहना है कि दिवाली पर रात आठ बजे से रात 10 बजे के बीच ही सिर्फ पटाखे फोड़े जा सकते हैं। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए फैसले का कड़ाई से पालन आवश्यक है।

जानिए क्या होते हैं ग्रीन पटाखे

ग्रीन पटाखे दिखने, जलाने और आवाज में सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं, लेकिन इनसे प्रदूषण कम होता है। सामान्य पटाखों की तुलना में इन्हें जलाने पर 40 से 50 फीसदी तक कम हानिकारक गैस पैदा होती है। नीरी के चीफ साइंटिस्ट डॉक्टर साधना रायलू कहती हैं कि इनसे जो हानिकारक गैसें निकलेंगी, वो 40 से 50 फीसदी तक कम निकलेंगी। ऐसा भी नहीं है कि इससे प्रदूषण बिल्कुल भी नहीं होगा। पर हां, ये कम हानिकारक पटाखे होंगे।

ज्यादातर पटाखे खतरनाक क्यों होते हैं, इनमें ऐसा क्या होता है?

पटाखों में आम तौर पर चार प्राथमिक तत्वों से मिलकर बने होते हैं जिनमें ऑक्सीडाइजर, ईंधन, रंग भरने वाले एजेंट और बाइंडर शामिल है। पटाखे में आग पकड़ने के लिए ऑक्सीडाइजर की आवश्यकता होती है, ईंधन आग को बनाए रखता है, रंग एजेंट इसे रंग और चमक देते हैं, जबकि बाइंडर इस मिश्रण को तब तक बनाए रखता है जब तक कि पटाखा खत्म न हो जाए। बेरियम जैसे रसायन रंग भरने वाले एजेंट हैं और मानव स्वास्थ्य पर उनके हानिकारक प्रभाव डालते हैं। ऐसे ही पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

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