जैव विविधता पार्क में दिखी विलुप्त हुई दुर्लभ तितलियों की 75 प्रजातियां

दिल्ली के जैव विविधता पार्क में बदलते पर्यावरण के चलते जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां विलुप्त होने की श्रेणी में पहुंच गई हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ पार्कों में 30 अक्तूबर से चार नवंबर तक चले तितली मूल्यांकन सप्ताह में 75 प्रजातियों की गणना की गई।
राजधानी के जैव विविधता पार्क तितलियों के लिए अच्छे आवास साबित हो रहे हैं। तितलियां बहुत महत्वपूर्ण परागणकर्ता हैं। पर्यावरण को स्वस्थ रखने के लिए जैव विविधता की अहम भूमिका है। बदलते पर्यावरण के चलते जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां विलुप्त होने की श्रेणी में पहुंच गई हैं। इन्हीं में तितली की भी कई दुर्लभ प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं। ऐसे में सात जैव विविधता पार्कों में 30 अक्तूबर से चार नवंबर तक चले तितली मूल्यांकन सप्ताह में 75 प्रजातियों की गणना की गई।
पिछले वर्ष 76 प्रजातियों की गणना की गई थी। इसमें यदि अक्टूबर 2023 के मौसम संबंधी आंकड़ों की तुलना पिछले 2 वर्षों से करें, तो इस वर्ष बारिश के दिनों की संख्या में भारी कमी आई है, जिसके परिणामस्वरूप इनकी प्रजातियों में मामूली गिरावट आई है। वहीं, सबसे अधिक 65 प्रजातियां अरावली जैव विविधता पार्क में देखी गईं, जबकि सबसे कम 17 प्रजातियां कालिंदी जैव विविधता पार्क में दिखी। यमुना, अरावली बायोडायवर्सिटी व नॉर्दन रिज में तितलियों की प्रजाति में मामूली कमी दर्ज की गई है।
यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में इस वर्ष 41 तितलियों की प्रजाति देखी गईं। वहीं, वर्ष 2022 में 47 व वर्ष 2021 में 58 प्रजातियां देखी गईं थीं। वहीं, अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क में इस वर्ष 65 प्रजातियां, वर्ष 2022 में 68 व वर्ष 62 तितलियों की प्रजातियां देखी गईं थी। इसी तरह नॉर्दन रिज में इस वर्ष 48, वर्ष 2022 में 59, वर्ष 2021 में 50 प्रजातियां देखने को मिली थीं। इस अभ्यास का नेतृत्व डीडीए बायोडायवर्सिटी पार्क के वैज्ञानिकों ने किया। इसमें कीट वैज्ञानिक डॉ. आयशा सुल्ताना और मोहम्मद फैसल ने पूरे अभ्यास का समन्वय किया। इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ कई विश्वविद्यालयों के छात्र शामिल रहे। कीट वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके पीछे की वजह अक्तूबर में वर्षा न होना और नमी में कमी आना है।
बदलते मौसम का पड़ रहा है असर
रिपोर्ट में सामने आया है कि इस वर्ष के मौसम बदलाव और अनियमित वर्षा के बावजूद, तितलियों का घनत्व, विविधता और उनकी गतिविधियां स्थायी हैं। स्थिर जनसंख्या इंगित करती हैं कि जैव विविधता पार्कों के आवास और विविध सूक्ष्म आवास तितलियों के लिए सुरक्षित आश्रय के रूप में कार्य कर रहे हैं। मौसम के बदलते मिजाज के बावजूद डीडीए बायोडायवर्सिटी पार्क में छह साल के तितली विविधता के पैटर्न में ज्यादा बदलाव नहीं दिखा है। तितलियां अपने एंटीना का उपयोग फूलों से निकलने वाली गंध का पता लगाने और उस तक पहुंचने के लिए करती हैं, जिससे परागण हुआ और अंततः भोजन का उत्पादन होता है।
प्रजातियों की तितलियां मिलीं
डीडीए जैव विविधता पार्क में तितलियों की 75 प्रजातियों के कुल 9350 की गणना की। इनमें से उनकी आबादी के आकार के अनुसार, शीर्ष दस प्रजातियां हैं। इसमें प्लेन टाइगर, येलो ऑरेंज टिप, लैमन पैंसी, कॉमन गल, जैबरा ब्लू, राउंडिड पियरोट, साइके, स्ट्रिपड टाइगर, कॉमन एमिग्रांट और कॉमन ग्रास येलो। सभी सात जैव विविधता पार्कों में छह दिनों के लिए तितली मूल्यांकन आयोजित किया गया। इसमें यमुना, अरावली, तिलपथ वैली, उत्तरी रिज, नीला हौज, तुगलकाबाद और कालिंदी जैव विविधता पार्क दिल्ली के नव विकसित हरे-भरे बुनियादी ढांचे हैं। यह दिल्ली के विभिन्न जिलों में फैले हुए यमुना बेसिन और अरावली में स्थित हैं, जो विभिन्न आवास प्रकारों का प्रतिनिधित्व करते हैं।





