आर.सी.एफ. के सामने झुग्गी-झोपड़ियों को लगी भयानक आग, सैंकड़ों झुग्गियां हुयी जलकर राख

आर.सी.एफ. के गेट नंबर-3 सामने प्रवासी मजदूरों द्वारा आबाद की गई झुग्गी-झोपड़ियों को गत शाम करीब 8 बजे अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी भीषण थी कि देखते ही देखते सैंकड़ों झुग्गियों को अपनी चपेट में ले लिया।
भले ही आग से किसी के कोई जानी नुक्सान की सूचना नहीं मिली, परंतु त्रासदी यह है कि गरीब प्रवासी मजदूरों के आशियाने बेकाबू हुई आग की चपेट में आने से राख हो गए। भले ही झुग्गी-झोपड़ियों को आग लगने के कारण का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला परंतु आर.सी.एफ. में दमकल विभाग की टीम ने चुस्ती व फुर्ती दिखाते हुए तुरंत दमकल विभाग की गाड़ियों लेकर घटना स्थल पर पहुंच गई और आग पर काबू पाना शुरू कर दिया।
बताया जा रहा है कि आग इतनी भयंकर थी कि आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग कपूरथला और सुल्तानपुर लोधी की टीमों का सहयोग लेना पड़ा। समाचार लिखे जाने तक दमकल विभाग की टीम द्वारा काफी हद तक आग पर काबू पा लिया गया था। आर.सी.एफ. सामने झुग्गी-झोपड़ियों को लगी आग की घटित घटना का जायजा लेने और स्थिति पर काबू पाने के लिए एस.डी.एम. कपूरथला लाल विश्वास जिला प्रशासन द्वारा मौके पर पहुंचे और प्रभावित मजदूरों के साथ हमदर्दी जताते हुए उनकी हर संभावित सहायता करने का आश्वासन दिलाया।
आग लगने की घटित घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची भुलाणा पुलिस चौकी के इंचार्ज ए.एस.आई. पूर्ण चन्द और थाना सदर कपूरथला के प्रमुख सोनमदीप विशेष तौर पर पहुंचे जिन्होंने लोगों को आग से बचाने के लिए अपनी ड्यूटी तनदेही से निभाई। आग पर काबू पाने के लिए आर.सी.एफ. की समाज सेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों के अलावा आसपास के गांवों की ग्राम पंचायतें, समाज सेवी कमेटियों द्वारा भी पुलिस प्रशासन का पूर्ण सहयोग दिया गया।
अचानक लगी आग की चपेट में आई झुग्गी-झोपड़ियों के मालिक ओमश्री, पप्पू सुनार, पूनम, रेखा, बिजली रानी, दीक्षा, शंभु यादव, दिनकर राओ, शशि मीना, हिमांशु, तोशी कुमारी, राजू बिहारी, नरेश, जीतू, शम्मी, देबू, सन्नी कुमार, चिंपू, कुनाल, बीजू, रामू, गणेश, अनिल, शिंदा आदि ने नम आंखों से बताया कि बहुत ही मेहनत से उन्होंने सर्दी के मौसम से पहले अपनी झुग्गियां बनाई थी, परंतु प्राकृति ने ऐसी मार मारी है कि वह अब घर से बेघर हो गए हैं। उन्होंने बताया कि घर में पड़ा राशन, घरेलू साज-सामान और उनकी मेहनत के पैसे भी झुग्गियां जलने के साथ साथ जल गए हैं। उन्होंने कहा कि अब समझ नहीं आ रहा था कि वह अब अपनी झुग्गियां दोबारा कैसे बनाएंगे और अपने खाने-पीने का गुजारा कैसे करेंगे।





