पंजाब: पिछले साल के मुकाबले 53 फीसदी कम जली पराली!

पंजाब के कृषि मंत्री ने कहा कि सीएम भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार ने पराली के प्रबंधन के लिए 350 करोड़ की योजना तैयार कर काम शुरु किया है। इसके तहत किसानों को सब्सिडी पर मशीनरी मुहैया कराई गई। सितंबर में धान की कटाई के मौसम से काफी पहले 24,000 मशीनों की खरीद को मंजूरी दी गई थी।

पंजाब सरकार ने दावा किया है कि राज्य में इस साल पराली जलाने के मामलों में बीते वर्षों के मुकाबले 53 फीसदी तक कमी आई है। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि राज्य में इस साल 15 सितंबर से 24 अक्तूबर के बीच पराली जलाने के 2,306 मामले दर्ज हुए हैं जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान 5617 मामले दर्ज किए गए थे।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 और 21 में पराली जलाने के क्रमशः 14,805 और 6058 मामले दर्ज हुए थे। उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पराली में आग लगाने की संख्या 2022 में 5798 मामलों से घटकर 2023 में 2704 रह गई है। उन्होंने बताया कि पिछले साल 25 अक्तूबर तक जितनी पराली जली थी, उसके मुकाबले इस साल 25 अक्तूबर तक 53 फीसदी की कमी आई है।
खुड्डियां ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने पराली के प्रबंधन के लिए 350 करोड़ की योजना तैयार कर काम शुरु किया है। इसके तहत किसानों को सब्सिडी पर मशीनरी मुहैया कराई गई है। उन्होंने बताया कि सितंबर में धान की कटाई के मौसम से काफी पहले, राज्य ने 24,000 मशीनों की खरीद को मंजूरी दे दी थी।

वर्तमान में राज्य में पराली प्रबंधन वाली 1.35 लाख मशीनें हैं और उनके उपयोग को अधिकतम करने के लिए ठोस प्रयास चल रहे हैं। इन मशीनों के उपयोग पर नजर रखने के लिए एक प्रणाली स्थापित की गई है और मशीनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए उच्च स्तरीय अधिकारियों द्वारा साप्ताहिक समीक्षा की जा रही है।

खुड्डियां ने आगे कहा कि पंजाब में किसानों का ध्यान अब पराली से होने वाली आय की तरफ भी गया है, क्योंकि पराली का उपयोग ईंट-भट्टों समेत कई तरह के उद्योगों में होने लगा है। उन्होंने कहा कि किसानों को पराली के लिए 170 से 200 रुपये क्विंटल तक दाम मिलने लगे हैं, जिसके चलते पराली जलाने के प्रति उनका रुझान कम होने लगा है।

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