193 मीटर की ऊंचाई पर बने प्लेटफार्म और ट्रैक पर दौड़ेगी ट्रेन, पढ़े पूरी खबर

 कश्मीर से कन्याकुमारी को जोड़ने वाली रेलवे परियोजना जल्द पूरी होने वाली है। इसके तहत 193 मीटर की ऊंचाई पर बने प्लेटफार्म और ट्रैक पर ट्रेन चलेगी जो इंजीनियरिंग की बड़ी मिसाल होगी। कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेलवे लिंक परियोजना का काम तेजी से चल रहा है। रेलवे ने इस परियोजना को पूरा करने का समय अप्रैल, 2023 निर्धारित किया है।

उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल के अनुसार परियोजना के कुल 272 किमी में से शेष 111 किमी पर काम तेज गति से चल रहा है। 111 किमी के हिस्से में 58 किलोमीटर सुरंग से होकर गुजरना होगा। जम्मू संभाग के रियासी जिले में ऊधमपुर-बारामुला रेललाइन का ही हिस्सा रियासी रेलवे स्टेशन का काम अंतिम चरण में है, जहां 105 फीट खाई पर बने पुल पर कंक्रीट स्लैब बिछाए हैं। पुल के लिए बने सभी खंभों में बीच वाले खंभे की ऊंचाई कुतुबमीनार (73 मीटर) से भी ज्यादा है। नींव के ऊपर खंभे की ऊंचाई 193 मीटर है।

यह पुल समुद्र तल से 331 मीटर ऊपर और भूकंप प्रतिरोधी है। पुल को 96 तारों से सहारा दिया जाएगा, जिनकी लंबाई 82 मीटर से 295 मीटर तक होगी ताकि हिमालय क्षेत्र में ट्रेन के तेज गति से चलने पर को परेशानी न हो। फरवरी में उत्तर रेलवे ने कटड़ा-बनिहाल के हिस्से में सबसे लंबी रेल सुरंग को पूरा किया था। 12.758 किमी लंबी सुरंग के बनने से कश्मीर को शेष देश से जोड़ने का काम तेज हो गया है।

पुल को भूकंपरोधी भी बनाया गया : पुल में लगे तमाम खंभों में बीच के खंभे की ऊंचाई कुतुबमीनार से भी ऊंची है। इन पुलों पर दो प्लेटफार्म बनाए गए हैं। पुल का एक हिस्सा स्टेशन से जुड़ा हुआ है जो दोनों तरफ से टनल से जुड़ा हुआ है। पुल को भूकंपरोधी भी बनाया गया है।

100 की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन : रेलवे के अनुसार, इस सेक्शन पर ट्रेन 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। पटरियां बिछाने का काम चल रहा है। अभी खंभों का काम पूरा हो चुका है। छत का निर्माण कार्य चल रहा है। इस छत में 10 मीटर की गहराई वाले 15 मीटर चौड़े मिश्रित स्टील स्लैब होंगे। सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट का काम मिशन मोड पर पूरा हो रहा है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद लोगों का ट्रेन से कश्मीर जाने का सपना पूरा हो जाएगा। सामरिक दृष्टि से परियोजना महत्वपूर्ण है। इसे 2022 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था।

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