अरुण जेटली बोले, राष्ट्रवाद से समझौता नहीं करेंगे

भाजपा राष्ट्रीय कार्यकाररिणी की बैठक के आखिरी दिन रविवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यूपीए सरकार पर बड़ा हमला बोला। प्रेस को संबोधित करते हुए अरुण जेटली ने आरोप लगाया कि आज देश में फैसला लेने वाली सरकार है, जिसका लक्ष्य सबका विकास करना है।
अरुण जेटली ने कहा कि उत्तराखंड में जो राजनीतिक संकट की स्थिति पैदा हुई है उसका कारण कांग्रेस का अंतर्विरोध है। वहां पार्टी का एक व्यक्ति मुख्यमंत्री बनता है तो दूसरा उसे गिराने में लग जाता है। भाजपा का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने कहा, देश तोडऩे की बात संविधान के खिलाफ है और हम राष्ट्रवाद से समझौता नहीं करेंगे। जेटली ने यह भी कहा कि पांच राज्यों में होने वाले चुनावों के लिए रणनीति तय हो गई है। उन्होंने कहा, इशरत जहां मामले में देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कांग्रेस के समय में खिलवाड़ हुआ।
‘भारत माता की जय‘ पर वाद-विवाद पर अरुण जेटली ने कहा कि हमें लगता है कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर बहस की गुंजाइश ही नहीं है। भारत का संविधान असहमति के लिए पूर्ण स्वतंत्रता की अनुमति देता है लेकिन राष्ट्र को तहत नहस करने की अनुमति नहीं देता।
वित्त विधेयक के खिलाफ मतदान किया
जेटली ने कहा कि अधिकांश विधायक कह रहे हैं कि उन्होंने वित्त विधेयक के खिलाफ मतदान किया लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने मत विभाजन के बिना इसे पारित लिया। यह अछुत स्थिति है जो संवैधानिक दायरे में आती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र संख्या बल के आधार पर चलता है और अगर विधानसभा अध्यक्ष नाकाम विधेयक को पारित मान रहे हैं तो यह विचित्र स्थिति है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में कांग्रेस के नौ विधायकों ने रावत सरकार से बगावत कर ली है जिसके बाद भाजपा ने रावत से इस्तीफा मांगा है। कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह बागी विधायकों की खरीद फरोख्त में लगी है।
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 28 मार्च तक का समय दिया है। जेटली राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पारित राजनीतिक प्रस्ताव के बारे में जानकारी दे रहे थे। जब उनसे पूछा गया था कि क्या कार्यकारणी की बैठक में उत्तराखंड की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा हुई तो उन्होंने कहा कि इस बारे में भाजपा की नहीं बल्कि कांग्रेस कार्यकारिणी में चर्चा की जरूरत है।
भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस ने बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु हर जगह अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा गिराई है और क्षेत्रीय दलों की पिछलग्गू बनकर रह गई है। दूसरी ओर भाजपा असम में गठबंधन की नेता है।





