अब भारत में बनी एमआरआई मशीन से हो पाएगी मरीजों की जांच, कीमत भी आधी से… 

भारत, मैगनेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (MRI) मशीन बनाने के काफी करीब पहुंच गया है। उम्मीद है कि अगले डेढ़ साल में भारत में बनी एमआरआइ मशीन से मरीजों की जांच संभव हो सकेगी। अभी एनआरआइ मशीन (1.5 टी) मुख्य रूप से जापान, ब्रिटेन, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों से मंगाई जाती है और इसकी कीमत दो से ढाई करोड़ रूपये होती है। इसीलिए एमआरआइ जांच की अधिक कीमत देनी पड़ती है। भारत में मशीन बनने से इसकी कीमत आधी से भी कम रह जाएगी और जांच कराने के लिए भी वर्तमान के मुकाबले काफी कम कीमत देनी पड़ेगी।
‘समीर’ ने पोवई स्थित अपने केंद्र में एमआरआइ लेबोरेटरी भी की स्थापित
इलेक्ट्रानिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन काम करने वाली सोसायटी फार एप्लायड माइक्रोवेव इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (समीर) पिछले कुछ साल से आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत पूरी तरह से स्वदेशी एमआरआइ मशीन के निर्माण को लेकर अनुसंधान में जुटी थी। ‘समीर’ ने एमआरआइ मशीन में लगने वाले विभिन्न उपकरणों को विकसित कर लिया है और मशीन के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से मैगनेट सिस्टम को भी इस साल अगस्त तक विकसित कर लिया जाएगा। तब तक के लिए ‘समीर’ ने मैगनेट सिस्टम बाहर से खरीदा है ताकि उसका इस्तेमाल करके भारत में एमआरआइ मशीनों का निर्माण शुरू हो सके। बाद में जब घरेलू स्तर पर मैगनेट सिस्टम विकसित हो जाएगा तो एमआरआइ मशीन बनाने में उसी सिस्टम का इस्तेमाल होने लगेगा। ‘समीर’ ने पोवई स्थित अपने केंद्र में एमआरआइ लेबोरेटरी भी स्थापित की है।
मशीन बनाने के लिए आवेदन मंगाए
‘समीर’ ने अब उद्योग जगत से एमआरआइ मशीन बनाने के लिए आवेदन मंगाए हैं। चयनित कंपनी को ‘समीर’ की तरफ से पूरी सहायता दी जाएगी और उन्हें अधिकतम डेढ़ साल में एमआरआइ मशीन का निर्माण करना होगा। इस मशीन को मेडिकल कमेटी के परीक्षण के साथ-साथ बीआइएस जांच से गुजरना होगा। सफल पाए जाने पर घरेलू स्तर पर विकसित एमआरआइ मशीन किसी सरकारी अस्पताल में स्थापित की जाएगी। डाक्टरों से हरी झंडी मिलने पर मशीन विकसित करने वाली कंपनी को मैन्यूफैक्चरिंग का लाइसेंस दिया जाएगा जो घरेलू स्तर पर उसकी बिक्री करने के साथ मशीन का निर्यात भी कर सकेगी। इस दौरान मशीन में पाई जाने वाली कमी को चिह्नित कर लिया जाएगा ताकि फाइनल निर्माण के दौरान मशीन में कोई कमी नहीं रह जाए। इस माह के आखिर तक आवेदन करने वाली कंपनियों का चयन किया जाएगा।





