चंद्र ग्रहण में किया गया यह छोटा सा दान आपको बनाएगा धनवान…

हिन्दू धार्मिक शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के बाद दान का विशेष महत्व माना जाता है। चंद्र ग्रहण के समय सूर्य, चंद्रमा एवं पृथ्वी एक ही क्रम में होतें है, जिसके कारण चंद्रग्रहण लगता है। ग्रहण के बाद कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से ग्रहण के दुष्प्रभाव दूर होतें है। ग्रहण के बाद दान से दुर्घटनाओं से बचाव होता हैं। ग्रहण की नकारात्मकता का तेज बहुत अधिक होता है , इसलिए उनसे बचाव होना बहुत आवश्यक होता है। ग्रहण से जुड़ी बहुत सी मान्यताएं है , इसके प्रभाव दोनों ही रूपों से हो सकतें है अच्छे भी और बुरे भी। ग्रहण से जुड़ें बुरे प्रभावों के लिए ही इन वस्तुओं का दान अहम माना जाता है।
इन वस्तुओं के दान से होता है विभिन्न समस्याओं का निवारण
चावल
चावल को अक्षत भी कहा गया है जिसका सम्बन्ध चंद्रमा से होता है। शुभ कार्यों से पहले सदैव अक्षत का प्रयोग किया जाता है। ग्रहण के बाद चावल का दान करने से घर में धन – धान्य की कोई कमी नहीं होती है।
दूध
चंद्रग्रहण के पश्चात दूध का दान करने से माता लक्ष्मी और भगवान नारायण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार दूध का विशेष महत्व चंद्रमाँ के साथ माना गया है।
शक्कर
शक्कर के दान से इष्ट देवी – देवताओं के आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।
चांदी
चांदी का दान बहुत विशेष होता है। इससे व्यक्ति को कुशाग्र बुद्धि एवं धन – वैभव से सम्पन्नता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पुराणों के अनुसार दान – पुण्य का जीवन में बहुत महत्व होता है। ग्रहण के पश्चात दान से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। सेहत से सम्बंधित विभिन्न परेशानियां दूर हो जाती है। ग्रहण के बाद इन वस्तुओं के दान से समस्त दुःख एवं व्यथा का नाश होता है। लंबे समय से आर्थिक परेशानियों से ग्रसित व्यक्ति के लिए ग्रहण के बाद यह दान हज़ार गुना फल की प्राप्ति के श्रोत के रूप में उजागर होता है। पारवारिक कलह – कलेश से मुक्ति मिलती है। व्यक्ति के मन पर बहुत प्रभाव होता है , वह कुशल और तेज बुद्धि होने का आशीर्वाद प्राप्त करता है। तथा उसका घर धन – संपंदा से परिपूर्ण रहता है।





