बिहार विधानसभा चुनाव : पिछली बार दो सीट पर जीती थी कांग्रेस, इस बार क्या होगा

बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय जिले की सात सीटों में महागठबंधन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कांग्रेस कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी इसको लेकर अटकलें तेज हो गई है। 2015 के चुनाव में कांग्रेस को दो सीटें बेगूसराय और बछवाड़ा मिली थींं और दोनों पर उसके उम्मीदवार जीते थे। तब महागठबंधन में जदयू ने भी राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था।
वहीं इस बार बिहार में जदयू एनडीए का हिस्सा है और राजद, कांग्रेस एवं भाकपा एक साथ हैं। जिले की दो सीटिंग सीटों के अलावा एक सीट मटिहानी पर भी कांग्रेस मजबूत दावेदारी कर रही है। पिछले चुनाव में जदयू की सीटिंग सीट होने के कारण इस सीट पर कांग्रेस पार्टी चुनाव नहीं लड़ सकी और जदयू के नरेन्द्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह ने भाजपा के सर्वेश कुमार को 22688 वोट से पराजित कर दिया था। इस बार कांग्रेस जदयू से अलग है तो अभय कुमार सिंह सार्जन, एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत सिंह और बड़े कारोबारी राजकुमार सिंह टिकट के बड़े दावेदार बन कर उभरे हैं। सीट अगर राजद के हिस्से में जाती है तो त्रिभुवन कुमार पिंटू को टिकट मिलने की पूरी संभावना है।
बेगूसराय सदर विधानसभा की सीट कांग्रेस की सीटिंग सीट है और महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष अमिता भूषण यहां से विधायक हैं। 2015 के चुनाव में कांग्रेस को राजद और जदयू के आधार वोट बैंक का लाभ मिला तथा उन्होंने भाजपा के सुरेन्द्र मेहता को 16531 वोट से हराया। एनडीए गठबंधन में उम्मीदवार को लेकर यहां मारामारी है, यह सीट भाजपा के कोटे में है और भाजपा के चुनाव लड़ने की योग्यता रखने वाले सभी लोगों की यह पसंदीदा सीट है। राज्य और केंद्रीय नेतृत्व क्या फाइनल करता है यह अभी गर्भ में है। टिकट को लेकर भाजपा में दावेदारों की भीड़ के कारण रस्साकशी की स्थिति बनी हुई है।
वहीं बिहार में कांग्रेस की तीसरी और सबसे चर्चित सीट बछवाड़ा है। यहां से पुराने नेता रामदेव राय कांग्रेस के तारणहार हुआ करते थे। कर्पूरी ठाकुर को हराकर सांसद बने  तथा पांच बार विधायक रह चुके रामदेव राय ने 2015 के चुनाव में लोजपा के अरविन्द कुमार सिंह को 36931 वोट से हराकर जीत हासिल की थी। पिछले सप्ताह उनका निधन हो गया है। अपने जीवन काल में ही उन्होंने विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास बड़े पुत्र शिवप्रकाश उर्फ गरीबदास से करवाना शुरू कर दिया था जिसके कारण कयास लगाए जा रहे हैं कि सहानुभूति वोट के लिए महागठबंधन शिव प्रकाश को अपना उम्मीदवार बना सकता है।
अब कांग्रेस नेतृत्व को तय करना है कि वह यहां से अपना उम्मीदवार देती है या सीट गठबंधन के सहयोगी को दे देती है। कम्युनिस्ट पार्टी और राजद इस सीट पर अपना दावा ठोक रही हैं। कम्युनिस्ट पार्टी से पूर्व विधायक अवधेश राय तथा राजद से जिलाध्यक्ष मोहित यादव यहां से प्रत्याशी हो सकते हैं। फिलहाल सब कुछ सीट के बंटवारे पर निर्भर करता है।
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