यूजीसी की धारा 12बी ग्रुप में शामिल हुआ एमएमएमयूटी

गोरखपुर। लम्बी कवायद के बाद मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की धारा 12बी का दर्जा मिल गया है। 12बी में शामिल हो जाने के बाद विश्वविद्यालय यूजीसी से मिलने वाली हर तरह की ग्रांट का हकदार बन गया है।
यूजीसी की उपसचिव कुंदला महाजन का पत्र भी विश्वविद्यालय प्रशासन को मिल गया है। उपसचिव ने बताया है कि एमएमएमयूटी को 12बी का दर्जा दिए जाने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट व विश्वविद्यालय की कार्रवाई रिपोर्ट 29 मई को यूजीसी की बैठक में रखी गई थी। मानक पूरा होने पर बैठक में शामिल सदस्यों ने सम्मति से दर्जा दिए जाने को मंजूरी दे दी है।
उल्लेखनीय है कि यूजीसी से 12बी का दर्जा हासिल करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने तकरीबन डेढ़ वर्ष पूर्व से प्रयास शुरू किया था। इसके बाद तत्कालीन कुलपति प्रो. श्रीनिवास सिंह के आवेदन पर अर्हता सत्यापन के लिए यूजीसी की चार सदस्यीय समिति एनआईटी जयपुर के निदेशक प्रो. उदय कुमार की अगुवाई में गोरखपुर का रुख किया था। 23 सितम्बर 2019 को विश्वविद्यालय के आधारभूत संरचना और संसाधनों की पड़ताल हुई थी। टीम ने अर्हता में बाधा न आने के कुछ सुझाव दिए थे। एमएमएमयूटी विश्वविद्यालय ने उन्हें शीघ्र ही पूरा कर इसकी जानकारी यूजीसी को दी थी। लेकिन लॉकडाउन की वजह से यह प्रयास एक बार फिर थम गया। नए कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कार्यभार संभालते ही प्रयास फिर तेज किया और अंततः सफलता मिल गई।
12बी की मान्यता से विश्वविद्यालय को कई फायदे होने वाले हैं। मान्यता मिलने के बाद विवि रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए यूजीसी से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकेगा। संगोष्ठी और सम्मेलन के लिए भी यूजीसी से धन मिल सकेगा। यूजीसी की योजनाओं के तहत शिक्षकों और शोध अध्येताओं की नियुक्ति हो सकेगी। महिला छात्रावासों के निर्माण और नए अध्ययन केंद्र खोलने में आ रही वित्तीय दिक्कतें दूर हो जाएंगी।
इस सम्बन्ध में कुलपति प्रो. जेपी पांडेय का कहना है कि यूजीसी से 12बी का दर्जा मिलने के बाद विश्वविद्यालय की वित्तीय दिक्कतों का समाधान हो गया है। अब विश्वविद्यालय में शोध और अध्ययन-अध्यापन का स्तर बढ़ाने में कोई समस्या नहीं आएगी।
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