नगर निगम कर विभाग में करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश, बीजेपी पार्षद ने सीएम को लिखा पत्र

गाजियाबाद। नगर निगम के कर विभाग में पिछले कई वर्षों से अधिकारी व कर्मचारी आपस में मिलकर बड़ी संपत्तियों के मालिकों को करोड़ों के टैक्स अनुचित लाभ पहुंचा रहे हैं। जिस कारण यह लाभ सालाना 50 करोड़ से ज्यादा का है। इसका खुलासा आज भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ पार्षद राजेंद्र त्यागी ने एक प्रेस कांफ्रेंस में किया। उन्होंने इस पूरे घोटाले से अवगत कराते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच की मांग की है, और इसमें शामिल निगम अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।
पार्षद त्यागी ने कहा कि शहर के सभी पांच जोन में सैकड़ों संपत्तियों पर अभी तक कर निर्धारण नहीं हुआ है। वहीं जिन संपत्तियों में कर निर्धारण किया गया है उनमें काफी गड़बड़ी है। मसलन कामर्शियल संपत्तियों पर साधारण टैक्स लगाया जा रहा है। दूसरी ओर एक परिसर में स्थित संपत्तियों पर कर लगाने में दोहरा मापदंड अपनाया गया है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम ने एक दशक में दो से तीन बार पूरे शहर में संपत्तियों का सर्वे कराया है। इसमें नगर निगम के लाखों रुपये खर्च हुए हैं। इसके बावजूद निगम के हर जोन में अलग अलग हजारों सपंत्तियां ऐसी हैं, जिनमें आज तक कर नहीं लगाया गया।
उन्होंने कहा कि निगम के जोनल कार्यालयों में तैनात कर अधीक्षक एवं अन्य कर्मचारी भ्रष्टाचार में पूरी तरह से लिप्त है। ऐसे लोग निगम का कर निर्धारण मानकों के हिसाब से नहीं करते हैं। लोगों पर नोटिस भेजकर पैसा ऐंठते है। यही नहीं कामर्शियल संपत्तियों को टैक्स निर्धारण करते समय भी एक परिसर में कुछ दुकानों की संपत्ति कर बनाई जा रही है। जबकि उसी परिसर में अन्य दुकानों और संपत्तियों पर कर नहीं लगाया जाता। इसमें भी कर्मचारी बड़ा खेल करते है।
उन्होंने कहा कि वसुंधरा जोन में हजारों संपत्तियों पर कारपेट एरिया पर टैक्स लगाने की बजाय कवर्ड एरिया पर टैक्स लगाया जा रहा है। इससे करोड़ों रुपये राजस्व का नुकसान निगम को हो रहा है। दूसरी ओर निगम के कर्मचारी सुविधा शुल्क लेकर हजारों संपत्तियों पर कामर्शिलय की बजाय रेजिडेंशिलयल टैक्स लगा रहे है। इसकी वजह से निगम के खजाने पर असर पड़ रहा है।
उन्हांेने कहा कि माॅल पर आवासीय से छह गुणा कर तथा व्यासायिक संपत्तियों पर पांच गुणा ज्यादा टैक्स लगाया जा सकता है,लेकिन निगम कर्मचारियों ने व्यवसायिक संपत्तियों पर आवासीय की दर से टैक्स लगा रखा है। उन्होंने कहा कि अधिकारी व कर्मचारी मिलकर निगम को 50 करोड़ से ज्यादा का नुकसान पहुंचा रहे हैं





