माँ मुझको आज विदाई दे

—जयश्री श्रीवास्तव, प्रयागराज
ज़या मोहनमाँ मुझको आज विदाई दे
तेरा लाल रण में जा रहा
भारत की रक्षा करने का
अपना कर्तव्य निभा रहा
माँ।।।।।
माथे पर तिलक लगाते हुए
हाथों में न तेरे कम्पन हो
मुझको विदा करते हुए
भीगे न तेरे माँ नयन हो
मैं शपथ दे के जा रहा
माँ।।।।
बहना मेरी राखी को तुम
संभाल कर रख लेना
लौटा तो बंधवाऊगा
न लौटा तो मेरी बहना
किसी फौजी भाई के हाथों में राखी तुम बांध देना
ये बात तुम्हे समझा रहा
माँ।।।।
माँ तुम तो वीर जननी हो
मुझे हिम्मत तूने दिलाई है
बचपन से वीरो की गाथा
घुट्टी में मुझे पिलाई है
मैं तेरे आदर्शो की रहो
पर चलने जा रहा
माँ।।।
धन्य है ऐसी माताएं जो
लालो को रण में भेजती है
सुनती है वीरगति पाया
पत्थर सी हो उठती है
ऐसी माताओ के चरणों मे
सारा भारत शीश झुका रहा
माँ।।।।
माँ जब मुझे गोली लगे
मेरी आँखें बंद होने लगे
गोदी में लिटा कर मुझको
माँ तुम प्यार से सहला देना
आभास यहाँ होगा मुझको
जैसे ममता तेरी पा रहा
माँ मुझको आज विदाई दे
तेरा लाल रण में जा रहा

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