भगवन भरोसे बच्चो का भविष्य! स्कूल में बच्चे खेलते गिल्ली डंडा, शिक्षक करते मस्ती

 
लखनऊ। बिगड़ते के इस युग में प्राइमरी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था के हलात लगातार बिगड़ते जा रहे है। बदलाव तो दूर की बात आज के दो दशक पूर्व भी शैक्षणिक व्यवस्था के ऐसे हालात नहीं थे। प्राइमरी स्कूल के बच्चे गिल्ली डंडा खेलने के बाद भोजन कर घर वापस लौट जाते है। स्कूलों का निरक्षण किया गया तो पता चला की बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस की सुचना प्रधान व ग्रामीणों ने एबीएसए व शंकुल प्रभारी को दी। जिसकी अभी कर्यवाई नहीं हो पायी है। नियुक्ति की मांग कर रहे यूपी के करीब 50 हजार शिक्षामित्रों के भरोसे प्राइमरी स्कूलों के बच्चों का भविष्य बनाया जा रहा है।
दरअसल प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों को छात्रवृत्ति एवं नि:शुल्क किताबें बटाने बस इसी की चिंता लगी रहती है। बच्चो ने कुछ आलेख लिखा या नहीं, गणित में गुणा भाग किया या नहीं यह अब विद्यालयों से नदारद हो गया है। जिसके चलते प्राइवेट स्कूलों का प्रेशर बढ़ गया है। लखनऊ क्षेत्र में ऐसे भी स्कूल हैं जहां प्रधान अध्यापक और सहायक अध्यापक न होने के कारण एक स्कूल के टीचर दूसरे शिक्षकों की ड्यूटी कर रहे हैं। बाकी जिन स्कूलों में शिक्षक नहीं है वहां पूरे स्कूल की पढ़ाई शिक्षामित्रों के भरोसे चल रही है। प्राथमिक विद्यालय के तैनात टीचर पढाई के समय स्वेटर बुनाई का काम कर हैं।

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