उन्नाव में महिला संबंधित अपराध तेजी से बढ़े दुष्कर्म छेड़छाड़ व पाॉक्सो एक्ट के सर्वाधिक मामले…

उन्नाव जिले में महिला अपराध पर अंकुश लगाते हुए उनको सुरक्षित करने में स्थानीय पुलिस अधिकारी कामयाब नहीं हो सके हैं। हालात यह हैं कि आमजन से लेकर जनप्रतिनिधि तक इस अपराध में लिप्त हैं। इसके सीधे प्रमाण भी हैं। जिले के हालात इतने बिगड़ गए हैं कि जिले में महिलाओं से संबंधित अपराधों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इसके चलते जिला जेल में हर तीसरा बंदी और कैदी महिला का अपराधी है। इसमें महिलाओं से दुष्कर्म और छेड़छाड़ के अलावा पॉक्सो एक्ट के मामले में जेल में हैं।
महिला अपराध पर अंकुश लगाने को जहां सरकारें, न्याय पालिका, पुलिस और प्रशासन लगातार प्रयासरत हैं। महिलाओं को सुरक्षित करने और उनसे संबंधित अपराध रोकने के लिए नित नए नियम-कानून बनाते हुए कई सुविधाएं भी दी जा रही हैं। इसे रोकने को जगह-जगह कार्यशाला आयोजित कर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। इसके बावजूद हालात यह हैं कि जिले के थाना-कोतवाली में ऐसे अपराधों की बाढ़ सी आई हुई है। जिला जेल में बंद हर तीसरा बंदी-कैदी महिला का अपराधी है।
आंकड़े बताते हैं कि उन्नाव में जो अपराध हो रहे हैं उनमें सबसे अधिक संख्या महिला अपराध से जुड़े हैं। ऐसा तब है जब बड़ी संख्या में महिला अपराध घरों की चहारदीवारी में दफन हो जाते हैं जिन्हें समाजिक डर से लोग बाहर नहीं आने देते। इसका प्रमाण बीते दिनों जिले में निरीक्षण को आईं एडीजी और जिले की नोडल अधिकारी अंजू गुप्ता ने महिला अपराध से जुड़ी 1090 सेवा में हजारों की संख्या में शिकायतें होने की बात कबूली थी।
28 फीसद बंदियों ने किए हैं महिला अपराध
जेल आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान में वहां 901 विचाराधीन बंदी हैं। जिनमें हत्या से लेकर मामूली चोरी व मारपीट में जेल पहुंचे लोग भी शामिल हैं लेकिन इनमें सबसे अधिक संख्या महिला अपराध से जुड़े लोगों की है। उनके खिलाफ दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म, छेड़छाड़ व पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। ऐसे लोगों की जेल में कुल संख्या 247 है।
273 दिन में 1090 पर पहुंची 3720 की चीख
जिले में महिला अपराध बढऩे की गवाही जेल आंकड़े तो दे ही रहे हैं साथ ही 1090 सेल में भी हजारों महिलाओं की चीख जिले से पहुंचने की पुष्टि हुई है लेकिन वह सिर्फ शिकायत बनकर ही दब गई। हालात यह हैं कि जिले से इस सेल पर व्यथा बताने वाली महिलाओं की संख्या एक जनवरी से 30 सितंबर तक मात्र 273 दिनों में 3720 पहुंची। जो रोजाना करीब 14 की संख्या है।
महिला थाना पहुंचकर 25 ने दर्ज कराए मुकदमे
महिला थाना प्रभारी सुनीता चौरसिया ने बताया कि वैसे तो ज्यादातर मामले संबंधित क्षेत्र के थाना-कोतवाली में ही दर्ज हो जाते हैं। इसके अलावा उनके थाना में भी अब तक 25 मामले पहुंचे हैं। जिनमें सभी महिला संबंधित अपराधों से ही जुड़े हैं। उनकी जांच की जा रही है।
इनका ये है कहना
जेल अधीक्षक एके ङ्क्षसह ने बताया कि जेल में जो विचाराधीन बंदी हैं उनमें सबसे अधिक महिला अपराध से जुड़े लोग हैं। अन्य मामलों से जुड़े अपराधियों की संख्या इससे काफी कम है। जेलर ब्रजेंद्र ङ्क्षसह ने कहा कि जेल में 240 सजायाफ्ता कैदी हैं जिनमें से सबसे अधिक 37 महिला अपराधों में सजा काट रहे हैं।





