बायपास पर हुए हादसे में छह लोगों की जान जाने के बाद शहर में मौजूद ब्लैक स्पॉट की शुरू हुई चर्चा

बायपास पर हुए हादसे में छह लोगों की जान जाने के बाद शहर में मौजूद ब्लैक स्पॉट की चर्चा फिर से शुरू हो गई है। यातायात पुलिस की रिपोर्ट में अभी भी जिले में नौ ब्लैक स्पॉट हैं, जहां पिछले तीन सालों में 87 लोग जान गंवा चुके हैं। वहीं 76 लोग घायल हुए हैं। यातायात पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार को जिस स्थान पर हादसा हुआ, वह ब्लैक स्पॉट कभी नहीं रहा है, लेकिन इसकी अलग से जांच की जाएगी। करीब तीन साल पहले तक इंदौर में तीन दर्जन ब्लैक स्पॉट थे, जहां लगातार सड़क हादसे होते रहते थे। लेकिन धीरे-धीरे सभी विभागों के सहयोग से इन स्पॉट को खत्म कर दिया गया है। यातायात पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार शहर में अभी भी नौ ब्लैक स्पॉट बचे हैं। अब योजना बनाकर इन्हें खत्म करेंगे।

धीरे-धीरे खत्म किए ब्लैक स्पॉट

शहर के ब्लैक स्पॉट को चिन्हित किए जाने के बाद सबसे पहले पूर्वी इलाके के रेडिसन और व्हाइट चर्च चौराहे को सुधारा गया। यहां ट्रैफिक भी सबसे ज्यादा था। हादसों का डर 24 घंटे बना रहता है। व्हाइट चर्च चौराहे वाले रोड पर दो बड़े स्कूल हैं, जहां छुट्टियों के समय ज्यादा वाहन निकलने से बच्चों की जान भी सांसत में रहती थी। रेडिसन चौराहे पर रोटरी नहीं होने से यहां व्यवस्था गड़बड़ थी। धीरे-धीरे सुधार किया गया। कई स्थानों पर संकेतक लगाए गए। कई लेफ्ट टर्न पर डिवाइडर लगाकर स्थिति सुधारी गई। डीएसपी उमाकांत चौधरी ने बताया कि योजना बनाकर अधिकांश ब्लैक स्पॉट खत्म कर दिए हैं। बाकी बचे नौ ब्लैक स्पॉट को भी खत्म कर दिया जाएगा।

सर्विस लेन को चौराहे पर नहीं खोलें

ब्लैक स्पॉट को खत्म करने का सबसे सही तरीका है वहां की इंजीनियरिंग में सुधार करना। डिवाडर की ऊंचाई कम रखें और उस पर किसी भी हालात में पेड़-पौधे न लगाएं। इससे काफी सुधार होगा। वहीं हाईवे पर सर्विस लेन का विशेष ध्यान रखें। इस सर्विस लेन को चौराहे पर नहीं खोलना चाहिए। – अतुल शेठ, वरिष्ठ इंजीनियर

Back to top button