पंजाब और दिल्ली के तीन कारोबारियों से शातिरों ने गजब अंदाज में कर ली ठगी…

शातिरों ने गजब तरीके से तीन करोबारियों को 10 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। शातिरों के एक ग्रुप ने इन काराेबारियों को रेडियो एक्टिव प्लेट के कारोबार में 1400 करोड़ फायदे का झांसा देकर अपना निशाना बनाया। कारोबारियों को जब इस ठगी का पता चला तो उनके हाेश उड़ गए। नवांशहर के कारोबारी लवदीप पराशर, दिल्ली से बेयरिंरग के कारोबारी राजेश कुमार और दिल्ली के रहने वाले आरबीआइ के रिटायर्ड अधिकारी केएस त्यागी शातिरों के शिकार हुए।
नवांशहर व दिल्ली के कारोबारी व रिटायर्ड आरबीआइ अफसर आए झांसे में
कारोबारियों ने इस बारे में नवांशहर में पुलिस में 14 लोगों के खिलाफ केस दर्ज करवाया है। आरबीआइ के रिटायर्ड अधिकारी केएस त्यागी ने बताया कि उनके एक जान पहचान वाले ने जयपुर के रहने वाले विनय अग्रवाल से उनकी मुलाकात करवाई थी। विनय अग्रवाल ने उन्हें बताया कि उसके पास एक रेडियो एक्टिव प्लेट है। इस प्लेट की कीमत कई हजार करोड़ रुपये में है। उन्होंने इस प्लेट को डिफेंस एंड रिसर्च डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) के पास जांच के लिए रजिस्टर्ड करवाया है। जांच के बाद वह इसे एक हजार करोड़ प्रति इंच के हिसाब से बेच देगा।
उन्होंने बताया कि विनय ने उन्हें दिल्ली में अमित गुप्ता का पता बताया। वे अमित गुप्ता जब मिले तो उसने बताया कि वह इंग्लैंड की रैसल एनर्जी एंड मेटल कंपनी का प्रतिनिधि है जो इस प्रकार के सामन को खरीदती है। इसी लालच में तीनों फंस गए। ठग तीनों से रेडियो एक्टिव प्लेट की जांच के नाम पर शातिरों ने 20 महीने में सात बार में 10 करोड़ तीन लाख 21 हजार रुपये ठग लिए। एसएचओ कुलजीत सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है।
उनके अनुसार, विनय अग्रवाल नाम के शख्स जयपुर के भवानी सिंह शेखावत के घर पर उपरोक्त लोगों को रेडियो एक्टिव प्लेट दिखाई। यह पूरी तरह पैक थी। इस पर डीआरडीओ की ओर से की गई पैकिंग की 82 लाख रुपये की रसीदें भी लगी थी। विनय ने उन्हें डीआरडीओ में इस प्लेट को रजिस्टर करवाने से संबंधित दस्तावेज भी दिखाए। ये दस्तावेज देखने में सही लग रहे थे।
पुलिस में दी गई शिकायत में बताया गया है कि शातिरों ने नवांशहर के लवदीप, दिल्ली के राजेश कुमार और केएस त्यागी को दिल्ली के अमित गुप्ता से मिलाया। गुप्ता ने उन्हें झांसा दिया कि अगर रेडियो एक्टिव प्लेट सही हो तो वे अपनी कंपनी से प्रति इंच 2400 करोड़ रुपये दिलवा सकता है। तीनों को लगा कि विनय एक हजार करोड़ में बेचने की बात कर रहा था, जबकि अमित 2400 करोड़ प्रति इंच की बात कर रहा है। प्लेट की जांच करवाकर वे विनय से खरीदकर अमित की कंपनी को बेच देंगे। उन्हें प्रति इंच 1400 करोड़ का फायदा होगा।
विश्वास बना रहे इसलिए ठगों ने उन्हें साढ़े छह करोड़ का चेक भी दे रखा था और कहा था कि काम न होने पर वह इस चेक को कैश करवा सकते हैं। ठगी का खेल मई 2017 में शुरू हुआ। जनवरी 2019 में जब ठग गायब हो गए तो तीनों को लगा कि उन्हें ठग लिया गया है। उन्होंने चेक बैंक में लगाया तो वह बाउंस हो गया।
पैसे लेने पर डीआरडीओ की देते थे रसीद
रेडियो एक्टिव प्लेट की जांच के नाम पर पैसे लेने के बाद शातिर उन्हें डीआरडीओ की फीस बताकर बकायदा रसीद देते थे। उन्हें भी लगता था कि सब सही हो रहा है। एक बार तो उन्होंने जांच के लिए डीआरडीओ का वैज्ञानिक बताकर टीम भी बुलाई थी।
इन पर हुआ केस दर्ज
राजस्थान के विनय अग्रवाल, पत्नी खुशबू अग्रवाल, विकास पोंडर, विजय अग्रवाल, भवानी ङ्क्षसह शेखावत, पत्नी दारा राठौर, रैसल एनर्जी एंड पूणे के डायरेक्टर अमित गुप्ता और उसकी पत्नी, गणेश इंगलो व उसकी पत्नी, मुंबई निवासी राकेश गोयल, असम के गिरीश अग्रवाल और पत्नी और रैसल एनर्जी एंड मेटल लिमिटेड।
शिकायतकर्ताओं को पूछताछ के लिए बुलाएंगे: एसएचओ
एसएचओ कुलजीत ङ्क्षसह का कहना है कि 14 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआत में शिकायतकर्ताओं को कुछ अन्य लोगों को बुलाया जाएगा।





