खास फैब्रिक रेजा से बने परिधान, गर्मी से बचाएगी और किसी तरह की एलर्जी भी नहीं होगी

गर्मियों में एजर्ली की समस्‍या आम बात है। इसी के साथ उमस और बढ़ता तापमान लोगाें के लिए मुसीबत बन जाता है। इसमें सबसे अधिक परेशानी एसिड हमले से प्रभावित लोगों को होती है। अब इससे बड़ी राहत मिलेगी। खास फैब्रिक रेजा से बने परिधान गर्मी मेें भी ठंड का अहसास कराएंगे और हर तरह के एलर्जी के खतरे से भी दूर रखेंगे। यह तैयार किया है अंतरराष्‍ट्रीय फैशन डिजायनर ललिता चौधरी ने।

रेजा फैब्रिक से बने कपड़ों की खूबी यह है कि इनसे किसी तरह की एलर्जी नहीं हो सकती है। गर्मी और बारिश के मौसम में यह शरीर के तापमान को पांच डिग्री तक कम रखता है। यह परिधान एसिड अटैक पीड़िताओं को तो बेहद राहत देना वाला होगा। दरअसल, एसिड अटैक पीड़िताओं को सामान्य कपड़ों से एलर्जी हो जाती है। खासकर सिंथेटिक कपड़ों से, जिसमें केमिकल का इस्तेमाल होता है।

अंतरराष्ट्रीय फैशन डिजाइनर ललिता चौधरी के अनुसार, रेजा फैब्रिक के जरिये एसिड हमले के पी‍डि़तों और बार-बार एलर्जी से परेशान होनेवाले लोगों की समस्‍या का समाधान होगा। इस फैब्रिक से बने परिधान त्वचा को एलर्जी और जलन से बचाएंगे। ये कपड़े गर्मी के मौसम में ठंडक का भी अहसास कराएंगे। गत दिनों रोहतक, हरियाणा में आयोजित कार्यक्रम में एसिड अटैक पीड़िताओं ने रेजा फैब्रिक से निर्मित परिधानों में कैटवॉक किया, जिसकी हर किसी ने सराहना की। इस कार्यकम में रोहतक के सांसद डॉ. अरविंद शर्मा भी मौजूद थे।

ललिता बताती हैं कि रेजा हथकरघा कला का ही प्राचीन फैब्रिक है। यह 150 वर्ष पहले भारत में बहुत इस्तेमाल होता था, लेकिन यह कला धीरे-धीरे लुप्त होती गई। उन्‍होंने बताया कि रेजा फैब्रिक ऑर्गेनिक कॉटन है। एंटी बैक्टीरियल और त्वचा के लिए मुफीद होने के कारण उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जिनको कपड़ों से एलर्जी होती है, खासकर एसिड अटैक पीडित।

ललिता ने कहा, पिछले दिनों मेरी मुलाकात एसिड अटैक पीड़ित युवतियों से हुई, जो आगरा में कैफे भी चलाती हैं। इन पीड़िताओं ने बताया कि बाजार में मिलने वाले सामान्य परिधान उनकी तकलीफ को बढ़ाते हैं। एलर्जी हो जाती है और शरीर में जलन से बुरा हाल हो जाता है। उनकी समस्या सुनने के बाद मैंने रेजा फैब्रिक से बने परिधान पहनने की सलाह दी। प्रयोग के तौर पर कुछ ड्रेस बनाई भीं, जिनसे उनको काफी आराम महसूस हुआ।

ललिता चौधरी ने बताया कि एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए वह रेजा फेब्रिक से तैयार ड्रेस पर कोई मुनाफा नहीं कमाएंगी। केवल धागे की कीमत ही वसूल की जाएगी। क्योंकि धागा गांव में विशेष रूप से तैयार करवाया जाता है। यह बाजार में उपलब्ध नहीं है। उन्होंने लखनऊ, आगरा और रोहतक की एसिड अटैक पीड़िताओं को कुछ परिधान उपहार के तौर पर भेंट किए हैं।  एसिड अटैक से पीड़ित रीतू सैनी ने कहा कि रेजा फैब्रिक से बने परिधान उनके लिए बड़ी राहत पहुंचाने वाले साबित हुए हैं।

केरल सरकार ने किया अनुबंध

रेजा फेब्रिक के फायदों को देखते हुए केरल सरकार ने रोहतक की फैशन डिजाइनर ललिता चौधरी के साथ अनुबंध किया है। केरल सरकार के अनुसूचित जाति व जनजाति विभाग के साथ हुए इस अनुबंध के तहत ललिता स्थानीय युवतियों को रेजा कला का प्रशिक्षण देंगी। इससे आर्गेनिक कॉटन को बढ़ावा मिलेगा और महिलाओं को कुटीर उद्योग।

पीएम मोदी की भी पसंद है

बता दें कि ललिता चौधरी द्वारा रेजा से तैयार किए गए परिधान न्यूयॉर्क फैशन वीक में भी अपना जलवा बिखेर चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, नेपाल, दुबई, आबू धाबी में भी रेजा फैब्रिक की खासी मांग शुरू हो गई है। रेजा स्टोल के कायल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हैं। पिछले दिनों जापान के प्रधानमंत्री जब भारत दौरे पर आए तो मोदी ने भारत के रेजा फैब्रिक से तैयार स्टोल धारण किया था, जिसे ललिता चौधरी ने ही तैयार किया था।
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रेजा फैब्रिक के परिधान की खूबियां

– जीरो कार्बन वाला कपड़ा।

– गर्मी में ठंडा और सर्दी में गर्म रहता है।

– एंटी बैक्टीरियल और स्किन-फ्रेंडली।

– अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाता है।

– पूरी तरह हैंडमेड, फैलाव बेहतर।

– इस्तेमाल और रखरखाव में आसानी।

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– गर्मी और बारिश के मौसम में यह शरीर के तापमान को पांच डिग्री तक कम रखता है

– हर तरह की एलर्जी से बचाता है। एसिड हमले के पीडि़तों के लिए बना वरदान

– रेजा हथकरघा कला का ही प्राचीन फैब्रिक व 150 वर्ष पहले भारत में बहुत इस्तेमाल होता था

– रेजा फैब्रिक ऑर्गेनिक कॉटन। यह एंटी बैक्टीरियल और त्वचा के लिए है मुफीद

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