जदूरों के नाम पर भाजपा कार्यकर्ताओं के नाम सूची में जोड़कर उन्हें उपकृत किया गया

शिवराज सरकार ने जिस मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना ‘संबल’ को श्रमिकों के लिए वरदान बताया था, उसमें भी बड़ा घोटाला सामने आया है। मजदूरों के नाम पर भाजपा कार्यकर्ताओं के नाम सूची में जोड़कर उन्हें उपकृत किया गया। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को भी यह गड़बड़ी मालूम थी। तत्कालीन श्रम आयुक्त राजेश बहुगुणा ने उन्हें रिपोर्ट दी थी, लेकिन उसे दबा दिया गया। रिपोर्ट भी मंत्रालय से गायब है।

श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने मंगलवार को आशंका जताई कि संबल योजना के 40 से 50 फीसदी हितग्राही फर्जी हो सकते हैं। एक से पंद्रह जुलाई के बीच जांच कराई जाएगी। दोषी के खिलाफ एफआईआर भी होगी। बहुगुणा ने अगस्त 2018 में सेम्पल सर्वे कराकर पड़ताल कराई थी। उसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी थी। इसे उन्होंने दबवा दिया और कार्रवाई नहीं की। इस पर मुख्यमंत्री कमलनाथ को 22 मार्च को नोटशीट लिखकर जांच के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया था।

आबादी से दोगुने पंजीयन

श्रम मंत्री ने बताया कि सेम्पल सर्वे में सिंगरौली की कुल जनसंख्या से लगभग दोगुने श्रमिकों का पंजीयन योजना में हुआ। अन्य जिलों में भी बड़ी मात्रा में कुल आबादी के 85 फीसदी श्रमिकों का पंजीयन किया गया।

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