जानिए देवगुरु बृहस्पति की शीघ्र कृपा दिलाने वाली पूजन विधि और महामंत्र

ज्योतिष के अनुसार देवताओं के गुरु बृहस्पति को एक शुभ देवता और ग्रह माना गया है। इन्हें न्याय शास्त्र और वेदों का ज्ञाता कहा गया है। 9 ग्रहों में से एक बृहस्पति के शुभ प्रभाव से सुख, सौभाग्य, लंबी आयु, धर्म लाभ आदि मिलता है। आमतौर पर देवगुरु बृहस्पति शुभ फल ही प्रदान करते हैं, लेकिन यदि कुंडली में यह किसी पापी ग्रह के साथ बैठ जाएं तो कभी-कभी अशुभ संकेत भी देने लगते हैं। ऐसे में बृहस्पति देवता की विधि-विधान से पूजा करने पर उनकी कृपा मिलने लगती है और दोष दूर हो जाता है। बृहस्पति देव की पूजन विधि

देवगुरु बृहस्पति की पूजा हमेशा शुक्लपक्ष में बृहस्पतिवार से ही करना चाहिए। चूंकि इस समय ज्येष्ठ मास का शुक्लपक्ष चल रहा है, ऐसे में उनकी पूजा एवं व्रत के लिए यह शुभ समय है। आज बृहस्पतिवार के दिन अपने हाथों में पीले फूल लेकर बृहस्पति देवता का आवाहन करें। साथ ही बृहस्पति देवता के मंत्र, बीज मंत्र, बृहस्पति गायत्री एवं बृहस्पति स्तोत्र का पाठ करें..

 

इन चीजों का करें दान 
देवगुरु बृहस्पति के पूजन के पश्चात् पीले वस्त्र, फल, चना, गुड़ चने की दाल आदि का दान करें। यदि सक्षम हों तो पुखराज रत्न, स्वर्ण का दान भी कर सकते हैं। इस व्रत से शीघ्र प्रसन्न होंगे देवगुरु

बृहस्पति देवता की कृपा पाने के लिए आप उनका व्रत रख सकते हैं। यह व्रत शुक्लपक्ष के पहले बृहस्पतिवार से प्रारंभ किया जाता है। जिसे कम से कम 16 या फिर अपनी मनोकामना को पूरी होने तक रखा जाता है। व्रत के दिन केले के पेड़ का पूजन करें और दिन में एक बार ही भोजन करें। इन मंत्रों से पूरी होगी मनोकामना

यदि आपके भीतर इन दिनों नकारात्मकता हावी हो रही हो चाह कर भी आपके प्रयासों के सकारात्मक फल नहीं मिल रहे हों तो आप जीवन में आई नकारात्मकता को दूर करने के लिए प्रतिदिन ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ का 108 बार जप अवश्य करे।

देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन ॐ भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का एक माला जाप करें। साथ ही भगवान विष्णु को संभव हो तो पीले रंग के फल का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बांटें।

यदि इन दिनों आपके मन में चीजों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती हो और तमाम प्रयासों के बावजूद कार्यों में सफलता न मिल रही हो और तमाम तरह के आर्थिक कष्टों ने घेर रखा हो तो भगवान विष्णु को प्रसन्न करने करने के लिए नियमित रूप से विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें। भक्ति-भाव से यह उपाय करने पर निश्चित रूप से बाधाएं दूर होंगी और कार्यों में सफलता मिलेगी।

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