साल भर की शोध के बाद तैयार किया 300 मीटर की ऊंचाई से स्थिर होकर दुश्मन पर नजर रखने वाला ड्रोन

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के बीटेक कंप्यूटर साइंस अंतिम वर्ष के छात्र हर्षित वर्मा ने एक ऐसा ड्रोन बनाया है जो उडऩे के दौरान बिल्कुल स्थिर हो सकता है। ये बिना हिले वीडियो और फोटो शूट कर सकता है। अभी तक जो ड्रोन बने हैं, फोटो या वीडियो शूट के दौरान हिलते हैं। यह ड्रोन उन क्षेत्रों में दुश्मनों की गतिविधियों पर नजर रख सकता है, जहां सैन्य अधिकारियों का पहुंचना मुश्किल है। इसे साल भर के शोध के बाद तैयार किया गया है।

आइआइटी की प्रयोगशाला में इसका परीक्षण सफल होने के बाद अब इसके व्यावसायिक उपयोग की प्रक्रिया चल रही है। तीन से पांच किमी तक के एरिना उडऩे वाला यह ड्रोन 300 मीटर की ऊंचाई तक जाने में सक्षम है। इसकी खास बात यह है कि इसे 15 किमी की रेंज में कहीं से भी नियंत्रित करने के साथ उस स्थान के वीडियो व फोटो देखे जा सकते हैं। इसके लिए इसमें ट्रांसमीटर, रिसीवर, ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है। प्रपोजल इंटीग्रल डेरीवेटिव व पाथ फाइंडिंग एल्गोरिदम का प्रयोग करके बनाए गए इस ड्रोन में ऑटोपायलट 2.8, ऑडीनो नैनो कंट्रोलर, सर्वो मोटर, 18 हजार आरपीएम की ब्रेसलेस डीसी मोटर, तीन सेल की 3300 मिली एंपियर ऑवर (एमएएच) लीथियम पॉलीमर की बैटरी लगी है। इसके अलावा एमटीयू-60-50 जायरोस्कोप व आर्टिफिशिल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल भी इसमें किया गया है।

एक घंटे तक हवा में उडऩे की क्षमता

आइआइटी की प्रयोगशाला में टेस्ट किया गया यह ड्रोन एक घंटे तक हवा में उडऩे में सक्षम है। प्रोग्राम करने के बाद तय एरीना में यह इस समय अंतराल तक उड़कर वहां का मुआयना कर सकता है। ढाई किलो का यह ड्रोन करीब एक किलो का वजन उठाने में भी सक्षम है। इसका इस्तेमाल उन स्थानों में दवाइयों की डिलीवरी व छोटे सामान पहुंचाने में किया जा सकता है जहां वाहनों का पहुंचना मुश्किल हो। इसके अलावा सैन्य जरूरतों का सामान पहुंचाने के लिए इसे और अपग्रेड किया जा रहा है। हर्षित वर्मा ने बताया कि आइआइटी के एयरोस्पेस इंजीनियङ्क्षरग साइंस विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एके घोष व सीएसजेएमयू के यूआइईटी निदेशक डॉ. रवींद्रनाथ कटियार के दिशा निर्देश में उन्होंने इसे तैयार किया है।

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