तीसरे बड़े मंगल को हनुमानजी को चखाया जायेगा , मलिहाबादी दशहरी के स्वादिष्ट ‘सीप’

मलिहाबादी दशहरी के ‘सीप’ का स्वाद तीसरे बड़े मंगल को हनुमानजी को चखाया जाएगा। इसके साथ ही लगभग दस दिन के अन्दर ही बाजार में भी डाल का दशहरी अपनी आमद दर्ज कराएगा। बागवानों की मानें तो इस बार पिछली बार के मुकाबले डाल के आम का दाम 70 रुपये से 80 रुपये प्रति किलो के बीच होने की उम्मीद है।  पाल का दशहरी आम 40 से 55 रुपये प्रतिकिलो कफुटकर बाजार में उपलब्ध है। 

 

गंगा-जमुनी परम्परा को भी मजबूती दे रहा दशहरी 

कई दशकों से दशहरी की पहली सीप से बड़े मंगल पर हनुमानजी का भोग लगाया जाता रहा है। यही नहीं मुस्लिम धर्म में भी इस नौरोज में इसे रखा जाता है। मलिहाबाद के बिराहिमपुर के बागवान विमल रावत कहते हैं कि दशहरी केवल लोगों के स्वाद के लिए ही मशहूर नहीं है बल्कि यह हिन्दू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देता रहा है। उन्होंने बताया कि दशहरी की पहली सीप हमेशा से बड़े मंगल पर हनुमानजी का भोग लगाया जाता रहा है। उम्मीद है कि तीसरे बड़े मंगल को इस बार की फसल की पहली सीप से हनुमानजी का भोग लगाया जाएगा। हालांकि इस बार कसमंडी खुर्द में बाग में अगमन आए बौर से एक सीप निकल चुकी है ।

दो ट्रक दशहरी की पहली खेप रवाना

शनिवार को मलिहाबाद में सड़क किनारे सजी आम की मंडी से लगभग दो ट्रक आम की पहली खेप रवाना की गई। वहीं आसपास की बाजारों में भी यहां से आम की सप्लाई शुरू हो गई है। आढ़तिया जाबिर ने बताया कि दो-तीन दिन में आसपास की सभी बाजारों में पाल का दशहरी बड़ी आसानी से उपलब्ध हो जाएगा। 

फसल कमजोर तो डाल का आम होगा महंगा 

बागवान सालिकराम यादव कहते हैं कि इस बार आम की फसल लगभग 40 फीसदी ही बची है, जबकि पिछली बार 50 फीसदी से ज्यादा फसल हुई थी। ऐसे में आम का दाम भी महंगा ही होगा। उन्होंने बताया कि शनिवार को सजी आम की मंडी में पाल के आम का दाम 40-55 रुपये के बीच खुला। पिछली बार यही आम 20 से 35 रुपये के बीच ही था। ऐसे में जब डाल का दशहरी बाजार में आएगा तो 70 से 80 रुपये के बीच तक दाम जाने की उम्मीद है।

एक महीने ही लुत्फ मिलेगा दशहरी का

आम के जानकारों का कहना है कि इस बार दशहरी आम की अवधि केवल एक महीने ही रहेगी। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बागों में बौर कुछ देर में आया जिससे फल भी देर में आया लेकिन आम जब पकना शुरू होगा तो इसके बीच का समय बहुत ही कम होगा। ऐसे में बाजार में दशहरी आम के मुकाबले लखनऊवा, सफेदा और चौसा ही ज्यादा समय तक टिक पाएगा।  

Back to top button