37 फीसदी वैश्विक सैलानी वैकल्पिक निवास को करते हैं पसंद

भारत दुनिया में वैकल्पिक निवास के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है। ट्रेवल पोर्टल बुकिंग.कॉम के मुताबिक, सैलानियों के बीच होम-स्टे जैसे विकल्पों का चयन तेजी से बढ़ा है। इस कारण वैकल्पिक निवास के बाजार में भी बढ़ोतरी हुई और भारत दुनियाभर में इसकी अगुवाई कर रहा है।

कंपनी के मुख्य कार्यकारी गिलियन टैन ने बताया कि उनके पोर्टल पर सूचीबद्ध कुल 8.80 लाख इकाइयों में सें 1.40 लाख वैकल्पिक निवास से जुड़े हैं। इतना ही नहीं 2017-18 में इस क्षेत्र की आपूर्ति वृद्धि करीब 68 फीसदी रही। यानी इसकी मांग में भी तेजी से इजाफा हो रहा है।

यहां सूचीबद्ध का मतलब उस इकाई से है, जिसे कोई यात्री अपने वैकल्पिक निवास के रूप में चुनता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर फरवरी 2018 से फरवरी 2019 के बीच कंपनी के 40 फीसदी सक्रिय उपभोक्ताओं ने वैकल्पिक निवास का चयन किया।

ये हैं प्रमुख वैकल्पिक निवास

वैकल्पिक निवास के क्षेत्र में मुख्य रूप से होम-स्टे, होटल, अपार्टमेंट, विला, केबिन, ट्री-हाउस, बोट और बेड एंड ब्रेकफास्ट जैसी सेवाएं आती हैं। भारत में इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी गोवा, कर्नाटक और केरल में हुई है। सीईओ टैन का कहना है कि हमारी विस्तार योजना में इस सेवा को भारत के अन्य शहरों तक पहुंचाना भी शामिल है, जिस पर विशेष तौर से जोर दे रहे हैं। अभी हमारा पहला लक्ष्य आपूर्ति को बेहतर करना है।

दो तिहाई भारतीयों को पसंद

कंपनी के सर्वे के मुताबिक, दो तिहाई भारतीय सैलानियों का कहना है कि वे इस तरह के वैकल्पिक निवास में एक बार जरूर रुकना चाहेंगे। उन्हें इस तरह का अनुभव पहले कभी नहीं मिला है। 43 फीसदी भारतीयों का कहना है कि वे अपने घर को ट्रेवल वेबसाइट पर सूचीबद्ध कराना चाहते हैं और सैलानियों को यहां वैकल्पिक निवास देने की सोच रहे हैं। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा महज 21 फीसदी ही रहा है।

यहां मोबाइल से बुकिंग ज्यादा 

कंपनी की प्रबंधक (भारत, श्रीलंका, मालदीव) रितु मेहरोत्रा का कहना है कि भारतीय बाजार अभी मोबाइल से संचालित हो रहा है। अधिकतर उपभोक्ता बुकिंग के लिए कंप्यूटर या डेस्कटॉप के बजाए मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। वैश्विक स्तर पर जहां मोबाइल से बुकिंग करने वालों का आंकड़ा 50 फीसदी है, वहीं भारत में ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या 60 फीसदी से भी ज्यादा है।

सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका

रितु के अनुसार, भारतीय पर्यटन क्षेत्र को तेजी प्रदान करने में सोशल मीडिया का अहम योगदान रहा है। खासकर टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर किसी पर्यटन स्थल को लेकर की गई पोस्ट सक्रिय सैलानियों को आकर्षित करने का काम करती है। कई मामलों में सैलानी जगह और निवास का चुनाव भी सोशल मीडिया से मिली जानकारी के आधार पर करते हैं। 
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