गूगल सर्च पर दिए कस्टमर केयर नंबर का न करें भरोसा, वर्ना-खाली हो सकता है बैंक खाता

एटीएम और डिजिटल भुगतान के सुविधाजनक होने से उपभोक्ता इनका खूब इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इसके साथ ही धोखाधड़ी भी खूब बढ़ी है। ठगों ने धोखाधड़ी के नए-नए तरीके भी इजाद कर लिए हैं। इन दिनों फर्जी कस्टमर के जरिए उपभोक्ताओं के साथ फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।
धोखाधड़ी करने वाले ऑनलाइन सर्च के दौरान उपभोक्ताओं को गलत वेबसाइट पर ले जाकर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, उपभोक्ता लेन-लेन में गड़बड़ी या किसी दूसरी जानकारी के लिए बैंक की वेबसाइट या कस्टमर केयर नंबर ऑनलाइन ढूढ़ता है।

इसी दौरान धोखाधड़ी करने वाले उपभोक्ता को गलत वेबसाइट पर ले जाते हैं जो बिलकुल वैसा ही दिखता है, जैसा बैंकों या बीमा कंपनियों की असली वेबसाइट होती है। उपभोक्ता को पता नहीं होता है कि वह जिस वेबसाइट से जानकारी ले रहा है वह सही नहीं है। वह कस्टमर केयर से जानकारी साझा करता है और फर्जीवाड़े का शिकार हो जाता है।

– 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के 23,000 बैंक धोखाधड़ी के मामले पिछले पांच साल में सामने आए
गूगल सर्च के इस्तेमाल से ठगी
डिजिटल लेन-देन या एटीएम के इस्तेमाल में गड़बड़ी होने पर आमतौर पर उपभोक्ता गूगल सर्च से कस्टमर केयर नंबर निकालते हैं। ठगी करने वाले गूगल सर्च के जरिए पहले यह पता करते हैं कि किस बात के लिए उपभोक्ता सबसे अधिक सर्च करते हैं। इसी आधार पर वह संबंधित बैंक या कंपनी का गलत कस्टमर केयर नंबर लिखकर गूगल पर डाल देते हैं। सर्च इंजन ऑप्टेमाइजेशन (एसईओ) की मदद से गूगल सर्च पर सबसे पहले इसी तरह के नंबर दिखते हैं।
वेबसाइट पर नजर
धोखाधड़ी करने वाले फर्जी वेबसाइट बनाते हैं। इस तरह की वेबसाइट पर बैंक या बीमा से जुड़े जानकारी के लिए एक क्लिक पर मिलने वाली जानकारी का दावा किया जाता है। जैसे ही कोई इनका इस्तेमाल करता है वह ठगी का शिकार हो जाता है।
बैंक से करें शिकायत
धोखाधड़ी होने पर बैंक जाकर या बैंक की आधिकारिक वेबसाइट से कस्टमर केयर नंबर लेकर तुरंत शिकायत करें। यदि आप किसी बैंकिंग एप का इस्तेमाल करते हैं तो उसपर भी कस्टमर केयर नंबर होता है। कार्ड से धोखाधड़ी होने पर उसे तुरंत बंद (ब्लॉक) करवा दें।
वेबसाइट पर लॉक का निशान देखें
आप किसी वेबसाइट से भुगतान कर रहे हैं तो सिक्योर सॉकेट्स लेयर (एसएसएल ) की जांच करें। यह एक तरह का सर्टिफिकेट होता है और उसी वेबसाइट को मिलता है जिसकी जिसके सुरक्षित होने की गारंटी होती है। इसके तहत वेबसाइट के यूआरएल में ताले का निशान होता है। इसके साथ यूआरएल में एस लिखा होने भी देखना चाहिए।





