राहुल गांधी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहेंगे या नहीं तब तक सिद्धू के भी भाग्य का फैसला नहीं होगा…

लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस अंतर्कलह से जूझ रही है। इसका क्षणिक लाभ स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को मिल रहा है, क्योंकि जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता कि राहुल गांधी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहेंगे या नहीं, तब तक सिद्धू के भी भाग्य का फैसला नहीं होगा। वहीं, लंबे समय से चुप्पी साधे रहे सिद्धू ने ट्वीट कर फिर से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। सिद्धू ने लिखा है- जिंदगी अपने दम पर जी जाती है, औरों के कंधे पर तो जनाजे उठा करते हैं। 
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह सिद्धू को बख्शने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं, लेकिन राहुल गांधी जिस प्रकार से अध्यक्ष पद छोड़ने की बात पर अड़े हैं, उसे देखकर सिद्धू को लेकर बातचीत का सही माहौल नहीं बन पा रहा है। कांग्रेस की पंजाब प्रभारी आशा कुमारी का कहना है, अभी पार्टी का सारा फोकस इस बात पर है कि राहुल अध्यक्ष बने रहते हैं या पद छोड़ते हैं। जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती तब तक पंजाब में भी यथास्थिति बनी रहेगी।
विभाग बदलने की तैयारी
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सिद्धू का स्थानीय निकाय विभाग बदला जाएगा। इसके बाद से ही कांग्रेस में स्थानीय निकाय विभाग लेने को लेकर होड़ मच गई है। पार्टी के सूत्र बताते हैं कि स्थानीय निकाय विभाग पाने को लेकर तीन मंत्री लाइन में लग चुके हैं। इनमें कई वरिष्ठ मंत्री भी हैं। हालांकि, पार्टी हाईकमान से जब तक हरी झंडी नहीं मिल जाती तब तक मंत्रियों के विभाग में किसी भी तरह का फेरबदल नहीं किया जाएगा।
अन्य मंत्रियों ने शुरू किया काम, सिद्धू गायब
चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद मंत्रियों ने अपने विभाग के रुटीन कामकाज को देखना शुरू कर दिया है, जबकि नवजोत सिंह सिद्धू अभी तक सामने नहीं आए है। सिद्धू ने ट्वीट कर अपनी उपस्थिति का एहसास करवाया। सिद्धू के लिए परेशानी यह भी है कि आधा दर्जन मंत्री सिद्धू के खिलाफ हो गए हैं। ऐसी स्थिति में सबकी नजर राहुल गांधी की तरफ है कि उनका रुख क्या होगा।





