रमज़ान : ”आतंक का धर्म होता है या नहीं होता”


आज कमान्डेंट इक़बाल अहमद की याद आ गई जो सहरी खाने के लिए उठा था पर सहरी छोड़ उन आतंकियों का खात्मा करने गया जिन्होंने जवानों पर हमला किया था.. अब सवाल यही है कि आखिर ये धर्म सिखाता क्या है? इक़बाल और उमर बनना या टाइगर और बुरहान बनना.. ये रमज़ान है और सबको रमज़ान मुबारक है….
अभी इस सवाल का जवाब आना बाकी है कि आतंक का धर्म होता है या नही होता है? सालों इस पर बहस हुई है पर बात अब भी अटकी हुई है.. फिर कह सकते हैं कि सवाल अभी बाकी है और जवाब कहीं मिले तो जरूर बताना.. और सवाल अभी बहुत बाकी है, पहला सवाल- क्या कश्मीर धर्म के रास्ते पर चल रहा है?

दूसरा सवाल- क्या कश्मीर का भविष्य सिर्फ धर्म के तराजू पर तोला जाएगा?
तीसरा सवाल- क्या धर्म सिर्फ एक ही समुदाय का है? अमरनाथ यात्रा, बच्चों की स्कूल बस पर हमला, आखिर ‘ये’ धर्म सिखाता क्या है? कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, वीडियो में स्थानीय लोगों ने आतंकवादी को भगाने में उसका पूरा साथ दिया.
मेरा चौथा सवाल ये है- क्या इसे कोई धर्म कह सकता है? मुझे देखकर ये बिलकुल लगा कि सभी स्थानीय लोग अपना धर्म बखूबी निभा रहे थे, हो सकता है उस समय भी वहां किसी के घर में खुशी का माहौल होगा इसीलिए लोगों ने उस आतंकी को भाग निकलने दिया. 28 साल हो गए दुनिया इधर से उधर हो गई ऐसा मुझसे अक्सर लोग कहते हैं पर जब अध्यात्म और कला की धरती को आतंक और नफरत से छीला जाएगा तो मेरे जैसा हर कश्मीरी भड़केगा और उसका मौन जरूर टूटेगा..
कश्मीरी हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार महाशिवरात्रि होता है…1990 के दौरान जब कश्मीरी हिंदुओं को उनकी धरती से खदेड़ कर बाहर निकाला गया उनको मारा गया. वे बेघर होकर टेंट में रहने पर मजबूर हो गए उस दौरान महाशिवरात्रि का त्योहार आया और आतंक से पीड़ित पंडित अपना सबसे बड़ा त्योहार मनाने के लिए इधर से उधर भटक रहे थे.. पर सवाल यही है कि क्या धर्म सिर्फ एक समुदाय का है?
आप सबको रमज़ान मुबारक हो.. ढेरों बधाइयां!! पर बात वही है कि त्योहार भी तो किसी एक का नहीं होता.. मुझसे हमेशा सब कहते हैं कि अब तुम्हें क्या चाहिए, मैं हमेशा कहती हूं कि ”मुझे बस अपने गांव जाना है” हर साल आप लोगों की तरह नानी और दादी के किस्सों को ढूंढने गांव जाना है.. क्या गृहमंत्री मुझे ये दे सकेंगे?? या फिर उन्होंने भी ये मान लिया है कि ”28 साल हो गए दुनिया इधर से उधर हो गई” अब जाने दो…
मेरे दोस्तों ने मुझे बताया कि रमज़ानों में चोरी नही होती, चीज़ें नहीं खोती, तम्बाकू से लेकर बीड़ी सब बंद होती है लेकिन किसी ने ये नही बताया कि इस में आतंक रुकता है क्या? क्योंकि ये सवाल आज भी वैसे का वैसा ही है कि ”आतंक का धर्म होता है या नहीं होता”.
अगर लगाम सेना की गोली पर है तो कश्मीर के मुस्लिम ये दावा कर सकते हैं कि आतंक रमज़ान के दिनों में नही दिखेगा और वो अल्लाह की इबादत में आज़ादी ढूंढेंगे?? मुझे शक है कि सवाल- आतंक का धर्म होता है? ऐसे का ऐसे ही रह जाएगा.. रमज़ान मुबारक हो उमर फयाज़ तुम्हें तुम्हारे घर में हो रहे जश्न के बीच मार दिया गया..





