लखनऊ यूनिवर्सिटी के विभागों में पीएचडी की सीटें नहीं होगी शून्य

लखनऊ। लखनऊ यूनिवर्सिटी में कुछ विभागों की पीएचडी सीटें शून्य होने के बाद कुलपति ने खुद इन विभागों के डीआरसी की रिपोर्ट संज्ञान में लिया है। जिसे देखने के बाद इन विभागों में अब भी सीटें निकले की बात कहीं है। कुलपति के ओर से इन विभागों के डीआरसी के रिपोर्ट में तय किए गए मानकों को सही से जांच किए बगैर सीटें शून्य बता दिया गया था।
पीएचडी एडमिशन के लिए आवेदन करने वाले छात्र निराश न हो
कुलपति प्रो.एसपी सिंह का कहना है कि इन कोर्सेस में इस बार प्रवेश होंगे। इनके सीटों को शून्य नहीं माना जाएगा। बस डीआरसी के ओर से नए पीएचडी ऑर्डिनेंस में तय मानकों के सही से समीक्षा न करने के कारण सीटें तय करने में दिक्कतें सामने आई है। उन्होंने इन कोर्सेस में पीएचडी एडमिशन के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को निराश न होने की बात कहीं है।
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कॉमर्स सहित तीन विभागों में सीटें जीरो होने की भेजी थी रिपोर्ट
लविवि में पीएचडी प्रवेश परीक्षा के बाद जबकि नए ऑर्डिनेंस के अनुसार सभी विभागों को सीटें तय करने के कहा तो, इसके बाद कॉमर्स, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और एंथ्रोपोलॉजी जैसे कोर्सेस में सीटें शून्य बता दिया गया था। इन विभागों में हुए डीआरसी में जो तीन मानकों का सख्ती से पालन करने को कहा गया था। उसके अनुसार इनमें सीटें ही नहीं निकल रही थी। जब यह मामला प्रकाश में आया तो कुलपति ने खुद इन सभी विभागों की डीआरसी रिपोर्ट को देखने के बाद इन कोर्सेस में अब भी सीटें निकलने की बात कहीं है।
उनका  कहना है कि मौजूदा समय में कॉमर्स में जितने भी शिक्षक है, वह तय मानक के अनुसार सीटें नहीं निकल रही हैं। लेकिन इस विभाग में कॉलेज के सीटों का कोई जिक्र नहीं किया गया हैं। जबकि केकेसी, शिया पीजी कॉलेज सहित दूसरे कॉलेजों में कॉमर्स में पीएचडी कराने की सीटें निकल रही हैं। वहीं पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एक रिसर्च स्कॉलर की मौत होने और एक स्कॉलर का सरकारी नौकरी में जाने से वहां पर सीटें है, लेकिन विभाग की डीआरसी में इन सीटों को शामिल नहीं किया गया है। वहीं एंथ्रोपोलॉजी में भी इसी तरह का मामला सामने आया है। वहां पर भी लविवि और कॉलेजों की सीटें निकल रही हैं।
कॉलेजों को मिलेगा पीएचडी कराने का मौका
कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि नए पीएचडी ऑर्डिनेंस को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है कि इसमें कॉलेजों को पीएचडी कराने का मौका नहीं जा रहा है। प्रो. सिंह ने बताया कि नए ऑर्डिनेंस में जो भी नियम और शर्तें है अगर कॉलेज का कोई भी प्रोफेसर उसे पूरा करता है। तो उसे पीएचडी कराने का मौका दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पीएचडी की अंतिम सीटें जो भी तय होगी उनमें कॉलेजों को पूरा हिस्सेदारी दिया जाएगा।
सात साल पूरा कर चुके पीएचडी स्कॉलर खाली करेंगे सीटें
कुलपति प्रो. सिंह ने बताया कि कई विभागों में ऐसे छात्र हैं, जिनका पीएचडी थीसिस जमा करने का अधिकतम समय सीमा बीत चुका है। वह बीते दो तीन सालों से लविवि गायब हैं। उनके बारे में न तो विभाग को कुछ पता है और नहीं उनके गाइड को। ऐसे सभी रजिस्ट्रड रिसर्च स्कॉलर की सीटों को खाली कराया जाएगा। उनको एक मौका दिया जाएगा कि वह दोबारा रजिस्ट्रेशन कराएं या फिर सीटें खाली करें। इसके लिए ऐसे सभी रिसर्च स्कॉलर की लिस्ट विभागों से लेकर उनको एक मौका दिया जाएगा।
‘विभागों की डीआरसी में सभी मानकों का सही नहीं देखा गया। वहीं जिन कोर्सेस में कॉलेजों में पीएचडी का मौका दिया जाना है वहीं दिया ही नहीं गया। जिस कारण से कई विभागों में सीटें जीरो बताई गई हैं।’
प्रो. एसपी सिंह, कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय

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