CBI जांच के बीच दाती महाराज ने बेची शनिधाम ट्रस्ट की सम्पतियां

जयपुर। अपने गुरूकुल में शिष्या के साथ दुष्कर्म मामले में सीबीआई जांच का सामना कर रहे दाती महारात उर्फ मदन राजस्थानी के खास सेवकों ने राजस्थान के विभिन्न जिलों में स्थित उसकी सम्पति सस्ते दामों में बेच दी है । श्री शनिधाम ट्रस्ट के प्रधान ट्रस्टी की हैसियत से दाती महाराज ने बेचान के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए है । दाती महाराज ने अपने खास सेवकों के माध्यम से इन सम्पतियों का बेचा है। दिल्ली पुलिस की जांच से असंतुष्ट हाईकोर्ट ने मामले की सीबीआई से जांच कराने के आदेश दिए थे । दाती महाराज की कुछ सम्पतियों को हाईकोर्ट के आदेश के तत्काल बाद और कुछ पिछले दिनों में बेची गई है।

इन सम्पतियों का हुआ बेचान

पाली के सोजत औधोगिक क्षेत्र में श्री शनिधाम ट्रस्ट के नाम से 16.47 लाख वर्गफीट में बनी मेंहदी फैक्ट्री को करीब एक करोड़ रूपए में बेचा गया है । हालांकि दस्तावेजों में इसके बेचान की कीमत कम दिखाई गई है । पाली जिले के ही आलास में तीन बीघा जमीन भी पिछले माह ही बेची गई है । इसी तरह जयपुर के गोपालपुरा बाईपास के पास देवी चिरंजीव कॉलोनी में श्री धाम ट्रस्ट के नाम से 125 वर्गगज में बने दो मंजिला मकान को भी बेच दिया गया । यह मकान दाती महाराज की एक भक्त गीता देवी ने उन्हे दान में दिया था । दाती महाराज द्वारा पूरक पत्र बनाकर इसके बेचान का हक लिया गया और फिर ट्रस्ट के सभी सदस्यों से सहमति पत्र लेकर इसे बेच दिया गया । दाती महाराज की खास सेविका मां श्रद्धा के नाम से कुछ अन्य सम्पतियों को भी बेचे जाने की जानकारी सामने आई है। दाती महाराज के एक निकटस्थ के अनुसार उन्हे इस बात की आशंका थी कि सीबीआई जांच आगे बढ़ने के बाद कहीं आसाराम जैसे हालात नहीं हो जाए और सम्पतियां बाद में बेची ही नहीं जा सके,इसलिए जांच के प्रारम्भिक दौर में ही इन्हे बेच दिया गया ।

दिल्ली में हुआ था मामला दर्ज

दाती महाराज पाली जिले में स्थित श्री शनिधाम ट्रस्ट के प्रधान ट्रस्टी है । यहां उनका बड़ा शनि मंदिर होने के साथ ही आश्रम है ।वे प्रवचन देते है । पाली में ट्रस्ट द्वारा स्कूल और अनाथालय संचालित किए जाते है । दिल्ली में भी उनका आश्रम है । दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी पुलिस थाने में दाती महाराज की एक शिष्या ने दुष्कर्म और अप्राकृतिक सेक्स का मामला उसके खिलाफ दर्ज कराया था । सम्पति बेचान मामले में दाती महाराज के ट्रस्ट का पक्ष जानने का प्रयास किया गया,लेकिन अधिकारिक रूप से कोई भी प्रतिनिधि बोलने को तैयार नहीं हुआ ।

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