उत्तराखंड: सहयोग निधि के कूपनों ने नेताओं के छुड़ाए पसीने

कांग्रेस के जिला, विधानसभावार सहयोग निधि के दिए गए लक्ष्य ने नेताओं के पसीने छुड़ा दिए हैं। औसतन हर विधानसभा को 30 लाख का लक्ष्य दिया गया है। इस लक्ष्य को लेकर पहाड़ी जिलों की विधानसभाओं के नेता परेशान दिखे, तो शहरी विधानसभाओं के नेता भी कसमसाते नजर आए। कांग्रेस ने हर बूथ से न्यूनतम 11 हजार रुपये का लक्ष्य तय किया है। सहयोग निधि के नाम पर पार्टी नेताओं को हर शख्स से न्यूनतम 20 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक स्वेच्छा से जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि अभी कूपन 100, 500 और 1000 रुपये के बनाए गए हैं। लेकिन पहाड़ों और कम आय वालों से भी सहयोग लेने को कूपन 20 रुपये और 50 रुपये तक के कूपन दिए जाएंगे। विधानसभावार ये लक्ष्य कहीं 20 लाख, तो कहीं 45 लाख तक भी पहुंच रहा है। अकेले अल्मोड़ा जिले में ही सोमेश्वर विधानसभा को 35 लाख, अल्मोड़ा 32 लाख, जागेश्वर 38 लाख समेत पूरे जिले को दो करोड़ से ऊपर का लक्ष्य दिया गया। चमोली जिले से आए प्रतिनिधियों ने विरोध भी जताया। साफ किया कि पहाड़ों में कैसे इतना बड़ा लक्ष्य पूरा हो सकता है। चमोली जिले का लक्ष्य भी एक करोड़ के करीब है। एक पदाधिकारी ने तो दो टूक कहा कि जो लोग कांग्रेस सरकारों में मंत्री रहे, वहीं इस लक्ष्य को पूरा करे।
सहयोग निधि के नाम कोई भी लक्ष्य थोपा नहीं गया है। बल्कि जनता से संपर्क साधते हुए उनसे सहयोग लिया जाएगा। ये कोई पहली बार नहीं होने जा रहा है। बल्कि हमेशा से राजनीतिक दल पार्टी के संचालन को लेकर जनता से सहयोग लेते आए हैं। कांग्रेस का अभियान भाजपा की तरह व्यापारी, उद्योगपतियों समेत अफसरों से लूट खसोट वाला नहीं होगा।
अध्यक्ष ने अपने लिये लिया सबसे बड़ा लक्ष्य
विधानसभावार दिए गए लक्ष्यों में सबसे बड़ा लक्ष्य प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को दिया गया। उन्हें चकराता विधानसभा से 45 लाख रुपये सहयोग निधि से जुटाने होंगे। हालांकि अध्यक्ष प्रीतम सिंह बार बार सहयोग निधि के नाम पर किसी भी तरह के लक्ष्य दिए जाने की बातों को खारिज करते रहे।





