2017-18 में भाजपा को मिला इतने करोड़ का चंदा, कांग्रेस ने फाइल नहीं किया रिटर्न

2016-17 के दौरान जहां मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी का कोष 681 से बढ़कर 717 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का कोष 262 से 291 करोड़ रुपये हो चुका है। भारत की दो कम्युनिस्ट पार्टियां जो बेशक देश की राजनीति में हाशिये पर है उनके कोष में भी इजाफा हुआ है। 2017-18 के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्कसिस्ट) के कोष में 104 करोड़ रुपये है। यह भाजपा की वार्षिक आय का 10 प्रतिशत है। इसके अलावा कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के कोष में 1.5 करोड़ रुपये हुए हैं।
कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने अभी तक चुनाव आयोग के पास अपनी वार्षिक रिटर्न जमा नहीं करवाई है। जबकि नियमों के अनुसार सभी मान्यता प्राप्त, पंजीकृत पार्टियों के लिए ऐसा करना अनिवार्य है। भाजपा को इस साल 2 जनवरी को भारत सरकार द्वारा अधिसूचित चुनावी बांड से 210 करोड़ रुपये का हिस्सा भी मिला है। दूसरे शब्दों में उसने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा जारी किए गए 222 करोड़ रुपये के बांड में से 95 प्रतिशत हासिल किया।
भाजपा के प्रवक्ता गोपाल अग्रवाल ने कहा पार्टी को मिली इतनी बड़ी राशि उसका वित्तीय लेनदेन को पारदर्शी बनाने के प्रयासों का नतीजा है। अग्रवाल ने कहा, ‘पार्टी ने वित्तीय लेन-देन को पारदर्शी बनाने के लिए सभी कोशिशे की हैं और यह चुनाव आयोग को भेजे गए ऑडिट रिपोर्ट में साफ दिखाई दे रहा है। हम पैसों को ऑनलाइन और चेक के जरिए लेते हैं। अब लोग नमो ऐप के जरिए भी पैसे दे सकते हैं। दूसरी पार्टियों ने अपने सारे पैसे की जानकारी नहीं दी है जो कालाधन रखने के समान है।’





