BSF की बढ़ी चिंता, पाकिस्तान से सटी सीमा में बढ़ी मुस्लिम आबादी

इस स्टडी ने जहां मुस्लिमों की बढ़ती आबादी को लेकर आगाह किया है वहीं राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का कोई सबूत नहीं मिला है। इसके अलावा यहां के अल्पसंख्यक समुदाय का पाकिस्तान से कोई लगाव नहीं है। साथ ही दोनों समुदायों में अभी तक कोई परेशानियां नहीं आई हैं। वह साथ में व्यवसाय करते हैं और उनके एक-दूसरे के साथ स्नेहपूर्ण रिश्ते हैं। बीएसएफ की स्टडी में हिंदू राइटविंग के संगठनों की बढ़ती सदस्यता के बारे में भी जिक्र किया गया है जिसका मुस्लिम हमेशा से विरोध करते रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हिंदू राइट विंग की गतिविधियों के कारण मोहनगढ़, नाचना और पोखरण के हिंदू अपने धर्म को लेकर काफी चिंतित हो गए हैं। इन संगठनों में लोगों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है और वह धार्मिक गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों में अपना विस्तार कर रहे हैं जिसमें ट्रेनिंग, मौद्रिक और शिक्षा को सांप्रदायिक समर्थन शामिल है। हालांकि किसी समुदाय के साथ सीधे कोई विवाद देखा नहीं गया है।’
इस स्टडी का नाम ‘स्टडी ऑफ डेमोग्राफिक पैटर्न इन द बॉर्डर एरिया ऑफ राजस्थान एंड इट्स सिक्योरिटी इंप्लिकेशन’ है। इसमें कहा गया है कि जैसलमेर के पोखरण और मोहनगढ़ में मौलवी लगातार आते रहते हैं खासतौर पर उत्तर प्रदेश के देवबंद से। मौलवी मुस्लिमों को कट्टरपन सिखाते हैं और उन्हें एक अलग पहचान बनाने के लिए एकजुट होने के लिए कहते हैं। जब इस बारे में बीएसएफ प्रमुख रजनीकांत मिश्रा से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों का निरीक्षण करने के लिए अक्सर ऐसी रिपोर्ट तैयार की जाती रहती हैं।





