फर्जी सरेंडर केस में 14 दिसंबर को आएगा रांची HC का फैसला, 514 युवकों ने किया था आत्मसमर्पण

खूंटी : झारखंड में सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के अफसरों की मिलीभगत से सात साल पहले 514 युवकों को फर्जी तरीके से नक्सली बताकर सरेंडर कराने के मामले पर 14 दिसंबर को रांची हाईकोर्ट का फैसला आना है. लगभग सभी जिलों में युवकों ने खुद को नक्सली बताकर सरेंडर किया था, जिसमे खूंटी के लगभग 100 से अधिक युवक शामिल थे.फर्जी सरेंडर केस में 14 दिसंबर को आएगा रांची HC का फैसला, 514 युवकों ने किया था आत्मसमर्पण

पुलिस बनने का सपना लिए खूंटी के युवकों को एक दलाल ने फंसाया और नकदी लेकर रांची के पुराना जेल पहुंचा दिया. वहां उन्हें बताया गया कि खुद को नक्सली बोलना है. युवकों को एक-एक पिस्टल और अन्य हथियार मुहैया कराए गए और सरेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई. सरेंडर के बाद युवकों को जेल परिसर के भीतर ही ट्रेनिंग देने का काम शुरू हुआ, जो डेढ़ से दो साल तक चला. इस दौरान युवकों को लगा कि कुछ तो गलत है. जेल से किसी तरह बाहर निकले तो पता चला कि उन्हें फंसाया गया है.

फर्जी नक्सली के नाम पर सरेंडर करवाने वाले दलाल रवि बोदरा ने खूंटी समेत पुरे झारखण्ड के लगभग 514 युवकों को सरेंडर करवाया, जिससे लाखों रुपये की वसूली भी की गई. रवि बोदरा से मामले की जानकारी लेने के लिए जब जी मिडिया ने उससे बात किया तो उसने सरेंडर की पूरी कहानी बताई. रवि बोदरा ने कहा कि इस सरेंडर में सूबे के डीजीपी से लेकर गृह सचिव और कई बड़े आला अधिकारी शामिल थे. साथी ही उन्होंने बताया कि सरेंडर करने वाले युवकों को जल्द ही बहाली की जानी थी, जिसकी तैयारी तत्कालीन सीएम अर्जुन मुंडा कर रहे थे. बोदरा के वकील ने फोन पर बातचीत में बताया कि मामला हाईकोर्ट में है. उन्होंने कहा कि युवकों का सरेंडर फर्जी नहीं होने का दावा किया है.

झारखंड में बड़े पैमाने पर हुए फर्जी सरेंडर के मामले पर राजनीती शुरू हो गई है. तोरपा विधायक पौलुष सुरीन ने सरकार और सिस्टम पर मिलीभगत का आरोप लगाया है. साथ ही उन्होंने कोर्ट से युवकों न्याय मिलने की उम्मीद जताई है. वहीं, जिले के नेता भी इस मामले की जानकारी होने की बात कह रहे हैं. झामुमो नेता ने कहा कि उस दौरान युवकों द्वारा हथियार लेकर सरेंडर करने का काम चल रहा था.

झारखंड में कथित फर्जी सरेंडर का मामला काफी सुर्खियां बटोर रहा है. इस मामले में 14 दिसंबर को हाईकोर्ट में फैसला सुनाया जाएगा. अगर फैसले में इसे फर्जी सरेंडर करार दिया जाता है तो प्रदेश की राजनीति तेज हो सकती है, क्योंकि उस दौरान झारखंड में अर्जुन मुंडा की सरकार थी. 

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