सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देश के बाद पटाखों की बिक्री पर लटकी तलवार, व्यापारी ग्रीन पटाखे से हैं अनजान

व्यापारियों की माने तो उन्होंने आज तक ग्रीन पटाखों का न तो नाम सुना है और न ही देखे हैं, ऐसे में बड़ा सवाल है कि कहां से ग्रीन पटाखे खरीदे जाएं। कुछ व्यापारी तो सांकेतिक विरोध दर्ज कराने के लिए प्याज की चरखी, सब्जी वाले आलू के पटाखे, अनार फल वाले अनार बम, शिमला मिर्च पटाखा स्टॉल पर लगाए हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट का दिवाली पर ग्रीन पटाखे चलाने का आदेश पटाखा मार्केट पर भारी पड़ा है। बाजार में ग्रीन पटाखे नहीं हैं। इसलिए कारोबारी दुकानों पर ताला लगाने को मजबूर हैं। कारोबारियों को यह भी आशंका है कि बीते साल की तरह ही इस साल भी कहीं पटाखे गोदाम में ही नहीं रखनें पड़ें। जामा मस्जिद, सदरबाजार, कुतुब रोड समेत सभी जगह पटाखों की दुकानों पर ताला लटका है। इसमें लाइसेंसी व अस्थाई लाइसेंसी दोनों तरह की दुकानें शामिल हैं।
इस दीवाली बजाएं ई-पटाखे
प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की जगह ई-पटाखे ले रहे हैं। ईको फ्रेंडली पटाखे रिमोट से चल रहे हैं। इनमें हाई वोल्टेज इलेक्ट्रोस्टेटिक डिस्चार्ज होता है, जिससे लाइट और साउंड इफेक्ट आ जाता है। इसे जलाने पर भी वैसा ही महसूस होता है जैसे पारंपरिक पटाखों को बजाते वक्त होता है। बाजार में इसकी कीमत सौ से पांच सौ रुपये तक है।
दुकानदारों के पास अभी अस्थाई लाइसेंस नहीं
दिल्ली में पटाखा विक्रेताओं के पास अभी अस्थाई लाइसेंस भी नहीं है। उन्हें उम्मीद है कि बुधवार को अदालत रुख कुछ नरम होगा और उन्हें पटाखा बिक्री करने के लिए अस्थाई लाइसेंस जारी कर दिए जाएंगे।
ग्रीन पटाखों से अनजान हैं व्यापारी
दिल्ली के व्यापारी ग्रीन पटाखों से अनजान हैं। दुकानदारों से लेकर खरीदारों तक किसी को भी इन पटाखों के बारे में जानकारी नहीं है। सदर बाजार पटाखा विक्रेता संघ के अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता का कहना है कि ग्रीन पटाखा बनाने वालों को ही नहीं पता है कि यह होता क्या है। यह पहली बार सुनने में आया है कि इस तरह के भी पटाखे होते हैं। जिनसे प्रदूषण या आवाज नहीं होती। सदर बाजार में पटाखों के प्रमुख विक्रेता हरजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि हमने तो आलू बम बनाया है। भिंडी बम बनाया है, शिमला मिर्च बम, प्याज चकरी बनाया है। दरअसल वे हरी सब्जियों को बम के रूप में प्रदर्शित कर सांकेतिक विरोध कर रहे हैं। व्यापारी हरजीत सिंह का कहना है कि पहली बार ग्रीन पटाखा का नाम सुना है। इस तरह का पटाखा बाजार में आता भी है तो इसमें एक से दो साल लग जाएंगे। फैन्यूफैक्चरर भी व्यापारियों को यही बातें बता रहे है। इसके लिए अलग से लाइसेंस भी लेना होगा।





