बिहार की राह पर चले अन्य राज्य, सहयोगियों ने भाजपा से की ज्यादा सीटों की मांग

बिहार में सत्ताधारी गठबंधन में भाजपा के बैकफुट पर आने का असर दूसरे राज्यों में भी सीटों के बंटवारे पर पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में भाजपा के सहयोगी पिछली बार के मुकाबले ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं। भाजपा के लिए 48 लोकसभा सीटों वाला महाराष्ट्र, 40 सीट वाले बिहार से ज्यादा महत्वपूर्ण है। यहां भी सहयोगी दल शिवसेना से भाजपा के संबंध तनावपूर्ण हैं। भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी रही सेना कुछ समय से विपक्ष के तौर पर पेश आ रही है। उसने अगला चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा भी की थी।

पिछली बार भाजपा ने 26 और शिवसेना ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था। दो सीट शेतकारी संगठन और आरपीआई अठावले को दी गई थीं। एक वरिष्ठ शिवसेना नेता का कहना है कि पिछले 25 साल में हमने तय किया था कि लोकसभा चुनाव में ज्यादा सीटें भाजपा लड़ेगी और विधानसभा में सेना। भाजपा ने 2015 के विधानसभा चुनाव में समझौता तोड़ दिया। इसलिए हम अपने दम पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। उनका कहना है कि अगर भाजपा समझौता चाहती है तो बिहार की तरह यहां भी बराबर-बराबर सीटों का बंटवारा करें। 

चूंकि शेतकारी संगठन के सांसद राजू शेट्टी अब कांग्रेस में शामिल हो गए हैं, इसलिए भाजपा और शिवसेना दोनों को 24-24 सीटों पर लड़ना चाहिए। रामदास अठावले को भाजपा अपने हिस्से की सीटें दे। कुछ ऐसी ही स्थिति उत्तर प्रदेश में भाजपा के सहयोगी दल ओम प्रकाश राजभर की सुहैलदेव राष्ट्रीय समाज पार्टी और अनुप्रिया पटेल के अपना दल की है। नीतीश कुमार और उद्धव ठाकरे की तरह राजभर भी भाजपा के प्रति तीखे बयान देते रहे हैं। हालांकि, अपना दल पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा का सहयोगी नहीं था। अपने परिवार की कलह से उबरने के बाद अनुप्रिया पटेल भी पिछली बार की दो सीटों से कहीं ज्यादा बड़ा हिस्सा चाहती हैं।

ऐसे हुआ गठबंधन

केंद्र में भाजपा सरकार बनने की चौथी वर्षगांठ पर हुए समारोह के दौरान बिहार में सीट के बंटवारे को लेकर चल रहे गतिरोध पर एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने हंसकर कहा था कि पिछली बार जदयू दो लोकसभा सीटें जीती थी। इस बार उसे लड़ने के लिए दो सीटें और दे देंगे। नीतीश कुमार मान जाएंगे। एनडीए में हर पार्टी को उसकी मौजूदा ताकत के हिसाब से सीटें मिलेंगी। यह छह महीने पहले की बात है। इसके बाद दोनों दलों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। हर दौर में जदयू को दी जाने वाली सीटों की संख्या में वृद्धि होती गई। पहले 4-5 सीटें दे रही भाजपा शुक्रवार को जदयू को 17 सीटें देने पर राजी हो गई।

सपा-बसपा गठबंधन की संभावना बढ़ी

उत्तर प्रदेश में महागठबंधन की घोषणा के बाद से पिछले छह महीनों में सपा-बसपा के रिश्तों पर बर्फ जम रही थी। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ बसपा गठबंधन नहीं हो पाने से लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की संभावनाएं कमजोर हो रही थीं। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इसके लिए सपा-बसपा पर सीबीआई के दबाव को जिम्मेदार करार दिया था। अब सीबीआई के पर कतरे जा चुके हैं। ऐसे में सपा-बसपा गठबंधन की संभावना बढ़ गई है।

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