अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय पर नाजायज दखलंदाजी का आरोप, अपने दायित्व का निर्वहन नहीं कर पा रही हज कमेटी

सेंट्रल हज कमेटी की कार्यपण्राली से खफा सदस्य अशरफ का इस्तीफा

लखनऊ । सेन्ट्रल हज कमेटी आफ इंडिया की लचर कार्यपण्राली और हज कमेटी में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के नाजायज दखलअंदाजी से आहत इस हज कमेटी के सदस्य सैयद मोहम्मद मकसूद अशरफ ‘‘अरशद मियां’ ने प्रेसक्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में इस्तीफा दे दिया। श्री अशरफ ने बड़ी साफगोई से कहा कि वह हाजियों की खिदमत करने के लिए हज कमेटी के सदस्य बने थे, दलाली और राजनीतिक फायदे के लिए नहीं। जब हमारी हज कमेटी के चेयरमैन ही कोई बोल्ड डिसीजन नहीं ले पाते हैं तो हज कमेटी का लचर होने लाजमी है।प्रेसक्लब में मीडिया से घिरे मोहम्मद मकसूद अशरफ ने कहा कि हज कमेटी अपने दायित्व का निर्वहन नहीं कर पा रही है। सरकार ने हज उड़ान पर 18 फीसदी जीएसटी लगायी, जबकि अन्तर्राजीय उड़ान पर 5 प्रतिशत ही जीएसटी है। इस दोहरा मानदण्ड क्यों? इस पर हज कमेटी के चेयरमैन महबूब अली कैसर जो कि सांसद भी हैं, चुप्पी साधे हैं।इस साल हजयात्रियों को मदीना मुनव्वरा के घटिया होटलों में ठहराया गया खराब होटलों में ठहराया गया।

वहां हाजियों के हंगामे के बाद हज कमेटी ने प्रत्येक हाजी को 400 रियाल देने का वादा किया था, लेकिन अब हज कमेटी अपने वादे से मुकर गयी है।उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की नाजायज दखलअंदाजी की वजह से हज कमेटी अपने कायरे का भलीभांति निर्वाह नहीं कर पा रही है। हज कमेटी आटोनामस संस्था है, लेकिन अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के हस्तक्षेप की वजह से उसकी स्वायत्ता नहीं रह गयी है। जब सारा काम अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय को ही कार्य करना है तो सिर्फ नाम के लिए हज कमेटी की क्या ज़रूरत है? सैयद मकसूद अशरफ ने कहा कि ना चाहते हुए भी हम बड़े दुख के साथ हज कमेटी की सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। हज कमेटी के चेयरमैन महबूब अली कैसर सांसद भी हैं। अगर वह चाहते तो हज कमेटी आफ इंडिया संवैधानिक तरीके से कार्य कर सकती है, लेकिन उनकी खामोशी ने सभी को आहत किया है। उन्होंने कहा कि मैंने 2017 की बैठक में कहा की हज सब्सिडी खत्म की जाए। सरकार ने हमारी बात मान ली। उस वक्त से हम लगातार मांग करते आ रहे हैं कि हजयात्रा के लिए उड़ानों के ग्लोबल टेंडरिंग की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने हज कमेटी की हर बैठक में यह सवाल उठाया, लेकिन अल्पसंख्यक मंत्रालय के दबाव के चलते हज कमेटी बैठक में पास किये मुद्दों को भी लागू नहीं करवा पाती है। उन्होंने कहा कि डालर की विनिमय दर बढ़ने से हज कमेटी आफ इंडिया को हुए 73 करोड़ के घाटे की भरपाई हाजी क्यों करें? लेकिन इस रकम को हाजियों से वसूले जाने की तैयारी चल रही है। यह सर्वथा गलत है और इसकी हर जगह विरोध होना चाहिए।
सरकार से इस्तीफा स्वीकार न करने की सिफारिश करेंगे हज कमेटी के चेयरमैन
लखनऊ। सेन्ट्रल हज कमेटी के चेयरमैन महबूब अली कैसर ने कहा कि सैयद मकसूद अशरफ एक जुझारू कार्यकर्ता हैं। वह सदैव हाजियों के हितों के लिए कार्य करते रहे। हज कमेटी को ऐसे ही निर्भीक कार्यकर्ता की जरूरत है। उनके न रहने से हज कमेटी कमजोर होगी। हमारा प्रयास होगा कि सैयद मकसूद फिर से हज कमेटी में काम करें। इसके लिए हम सरकार से सिफारिश करेंगे वह सैयद मकसूद अशरफ के इस्तीफा स्वीकार ना करे। साथ ही हम श्री अशरफ की नाराजगी भी दूर करने का प्रयास करेंगे। हमें उम्मीद है कि हाजियों के हितों को देखते हुए वह मान जाएंगे। हज कमेटी के चेयरमैन व सांसद महबूब अली कैसर ने बताया कि कि हज कमेटी पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की दखलअंदाजी व दबाव की बात सही है। पहले जब सेन्ट्रल हज कमेटी विदेश मंत्रालय के अधीन थी तब ऐसा कुछ नहीं था, लेकिन अक्टूबर 2016 में जब से हज कमेटी को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के अधीन किया गया तो यह दिक्कत हो गयी है।

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