मिशन 2019: दलित वोटों की गोलबंदी को ले JDU की मुहिम अब पकड़ रही रफ्तार

अपने पक्ष में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय की गोलबंदी बरकरार रखने को लेकर जदयू सतर्क है। पिछले चुनाव के समय आरक्षण की समीक्षा और फिर हाल में एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की सुप्रीम कोर्ट की पहल जैसे मामलों के कारण यह समुदाय संशय की स्थिति में है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व की स्थिति बहाल कर दी है, मगर हाल के दिनों में आर्थिक आधार पर आरक्षण की उठ रही मांग के कारण यह वर्ग कुछ नाराज भी है।
2005 से लेकर अबतक अनुसूचित जाति के लिए महादलित विकास मिशन एवं महादलित आयोग के गठन करने वाली और फिर इस समुदाय के लिए विभिन्न योजनाओं का कार्यान्वयन करने वाला सत्ताधारी दल जदयू इस स्थिति को भांप सतर्क हुआ है।
यही कारण रहा कि जब पार्टी ने अपने कार्यक्रमों की घोषणा की तो सबसे पहले जिलों में दलित-महादलित सम्मेलन आयोजित करने का फैसला लिया। पहली अक्टूबर से आरंभ हुआ यह कार्यक्रम मंगलवार को संपन्न होगा।
सम्मेलन के लिए जो छह टीमें गठित हुई हैं, उनमें से एक का नेतृत्व खुद राष्ट्रीय महासचिव आरसीपी सिंह कर रहे हैं, जबकि शेष पांच टीमों का नेतृत्व एससी समुदाय से आने वाले मंत्री या पूर्व मंत्री कर रहे हैं। अब 25 अक्टूबर से प्रमंडलों में यह कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिसके लिए नीतीश कुमार के करीबी आरसीपी सिंह के ही नेतृत्व में फिर से 11 सदस्यीय टीम बनी है।
जिलों के लिए गठित एक टीम का नेतृत्व कर रहे पूर्व मंत्री श्याम रजक ने कहा कि एससी-एसटी के लोग फिर एक बार नीतीश कुमार के पक्ष में खड़े होंगे। मगर गठबंधन में शामिल नेताओं को आरक्षण से संबंधित बयानों से परहेज करना होगा।
जदयू के दलित एवं महादलित प्रकोष्ठ के संगठन प्रभारी विद्यानंद विकल ने बताया कि जिला स्तर पर सम्मेलनों के अलावा आंबेडकर हास्टल में भी अभियान चला है। प्रदेश में इस समय एससी-एसटी छात्रों के लिए 88 हास्टल हैं।
भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया एवं नालंदा में स्थित इन हास्टल में विकल के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने दौरा किया था। उनके मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में एससी-एसटी के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है, मगर हमारी मुहिम ने उनपर गहरा छाप छोड़ा है।
आंबेडकर हास्टल में रहने वालों को प्रति माह एक हजार रुपये और 15 किलो अनाज देने, बीपीएससी एवं यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वालों को क्रमश: 50 हजार एवं एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने आदि योजनाओं के कारण भी बेहतर रिस्पांस है।
जदयू के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, इस मुहिम से स्थिति पहले से बेहतर हुई है। पहले यह समाज आरक्षण की समीक्षा, आरक्षण के खिलाफ बयानबाजी, प्रोन्नति में आरक्षण आदि मुद्दों के कारण नाराज था मगर फिलहाल ये तटस्थ हैं।





