B,day Spcl: इस फिल्म ने रातों रात नसीरुद्दीन शाह बन गए थे बॉलीवुड के सुपरहिट सितारे

मुंबई। बॉलीवुड में नसीरूद्दीन शाह को एक ऐसे दिग्गज अभिनेता के तौर पर जाना जाता है जिन्होंने अपने सशक्त अभिनय से समानांतर सिनेमा के साथ-साथ व्यावसायिक सिनेमा में भी दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाई। आज नसीरुद्दीन शाह अपना 68वां जन्मदिन मना रहे हैंं। उनके जन्मदिन के अवसर पर आइए एक नजर डालते है उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातों पर।

प्रारंभिक जीवन

नसीरुद्दीन का जन्म उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में 20 जुलाई 1950 को हुआ। नसीर की प्रारंभिक शिक्षा अजमेर और नैनीताल से हुई हैं। नसीर ने अपनी स्नातक की पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पूरी की। नसीर का बचपन से ही अभिनेता बनने का सपना था। इस सपने के साथ ही उन्होंने  साल 1971 में दिल्ली नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा स्कूल में दाखिला ले लिया।

फिल्मी सफर

साल 1975 में नसीरूद्दीन शाह की मुलाकात जाने माने निर्माता निर्देशक श्याम बेनेगल से हुई। श्याम बेनेगल उन दिनों अपनी फिल्म निशांत बनाने की तैयारी में थे। श्याम बेनेगल को नसीरूद्दीन शाह में एक उभरता हुआ सितारा दिखाई दिया और अपनी फिल्म में काम करने का अवसर दे दिया।

साल 1976 नसीरूद्दीन शाह के सिने कैरियर में अहम पड़ाव साबित हुआ। इस वर्ष उनकी भूमिका और मंथन जैसी सफल फिल्म प्रदर्शित हुयी। दुग्ध क्रांति पर बनी फिल्म मंथन में नसीरूद्दीन शाह के अभिनय के नये रंग दर्शको को देखने को मिले। इस फिल्म के निर्माण के लिए गुजरात के लगभग पांच लाख किसानों ने अपनी प्रति दिन की मिलने वाली मजदूरी में से दो-दो रूपये फिल्म निर्माताओं को दिये और बाद में जब यह फिल्म प्रदर्शित हुई तो यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई।

वर्ष 1979 मे प्रदर्शित फिल्म स्पर्श में नसीरूद्दीन शाह के अभिनय का नया आयाम दर्शकों को देखने को मिला। इस फिल्म में अंधे व्यक्ति की भूमिका निभाना किसी भी अभिनेता के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। चेहरे के भाव से दर्शकों को सब कुछ बता देना नसीरूद्दीन शाह की अभिनय प्रतिभा का ऐसा उदाहरण था, जिसे शायद ही कोई अभिनेता दोहरा पाये। इस फिल्म में उनके लाजवाब अभिनय के लिये उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया।

वर्ष 1980 में प्रदर्शित फिल्म आक्रोश नसीरूद्दीन शाह के सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में एक है। गोविन्द निहलानी निर्देशित इस फिल्म में नसीरूद्दीन शाह एक ऐसे वकील के किरदार में दिखाई दिये जो समाज और राजनीति की परवाह किये बिना एक ऐसे बेकसूर व्यक्ति को फांसी के फंदे से बचाना चाहता है। हालांकि इसके लिये उसे काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।

वर्ष 1983 में नसीरूद्दीन शाह को सई परांजपे की फिल्म कथा में काम करने का अवसर मिला। फिल्म की कहानी में कछुये और खरगोश के बीच दौड की लड़ाई को आधुनिक तरीके से दिखाया गया था। वर्ष 1983 में नसीर के सिने कैरियर की एक और सुपरहिट फिल्म जाने भी दो यारो प्रदर्शित हुयी। कुंदन शाह निर्देशित इस फिल्म में नसीरूद्दीन शाह के अभिनय का नया रंग देखने को मिला। इस फिल्म से पहले उनके बारे में यह धारणा थी कि वह केवल संजीदा भूमिकाएं निभाने में ही सक्षम है लेकिन इस फिल्म उन्होंने अपने जबरदस्त हास्य अभिनय से दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया।

वर्ष 1985 में नसीरूद्दीन शाह के सिने करियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म मिर्च मसाला प्रदर्शित हुई। सौराष्ट्र की आजादी के पूर्व की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म मिर्च मसाला ने निर्देशक केतन मेहता को अंतराष्ट्रीय ख्याति दिलाई थी। यह फिल्म सामंतवादी व्यवस्था के बीच पिसती औरत की संघर्ष की कहानी बयां करती है।

अस्सी के दशक के आखिरी वर्षो में नसीरूद्दीन शाह ने व्यावसायिक सिनेमा की ओर भी अपना रूख कर लिया। इस दौरान उन्हें हीरो हीरा लाल मालामाल जलवा त्रिदेव जैसी फिल्मों में काम करने का अवसर मिला जिसकी सफलता के बाद नसीरूद्दीन शाह को व्यावसायिक सिनेमा में भी स्थापित कर दिया। नब्बे के दशक में नसीर ने दर्शको की पसंद को देखते हुये छोटे पर्दे का भी रूख किया और वर्ष 1988 में गुलजार निर्देशित धारावाहिक मिर्जा गालिब में अभिनय किया। इसके अलावा वर्ष 1989 में भारत एक खोज धारावाहिक में उन्होंने मराठा राजा शिवाजी की भूमिका को जीवंत कर दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया।

अभिनय में एकरूपता से बचने और स्वयं को चरित्र अभिनेता के रूप मे भी स्थापित करने के लिये नब्बे के दशक में उन्होंने स्वयं को विभिन्न भूमिकाओं में पेश किया। इस क्रम में 1994 में प्रदर्शित फिल्म .मोहरा .में वह खल चरित्र निभाने से भी नहीं हिचके। इस फिल्म में भी उन्होंने दर्शकों का मन मोहे रखा। इसके बाद उन्होंने टक्कर हिम्मत चाहत राजकुमार और सरफरोश और कृष जैसी फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाकर दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया।

नसीरूद्दीन शाह के सिने करियर में उनकी जोड़ी स्मिता पाटिल के साथ काफी पसंद की गई। नसीरूद्दीन शाह अब तक तीन बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किये जा चुके है। इन सबके साथ ही नसीरूद्दीन शाह तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये है।

फिल्म के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुये वह भारत सरकार की ओर से पदमश्री और पदमभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किये जा चुके है। नसीरूद्दीन शाह ने तीन दशक लंबे सिने करियर में अब तक लगभग 200 फिल्मों में अभिनय किया है। नसीरूद्दीन शाह आज भी उसी जोशोखरोश के साथ फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय है।

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