सेबी शेयर बायबैक के नियमों में बदलाव करने का लिया बड़ा फैसला
नई दिल्ली । बाजार नियामक सेबी शेयर बायबैक के नियमों में बदलाव की तैयारी कर रहा है। बदलाव से शेयर बायबैक से जुड़े विभिन्न प्रावधानों में स्पष्टता आएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। सेबी ने बायबैक के वर्तमान नियमों की समीक्षा की है। अधिकारी ने बताया कि इसकी भाषा को सरल बनाने, अनियमितताओं को दूर करने और नियमों को नए कंपनी कानून के अनुरूप करने के लिए इनमें बदलाव पर विचार हो रहा है।
इसके तहत बायबैक अवधि को परिभाषित किया जाएगा। साथ ही पोस्टल बैलट का परिणाम आने के बाद बायबैक ऑफर की सार्वजनिक घोषणा की जरूरत का प्रावधान स्पष्ट किया जाएगा। नए फ्रेमवर्क में ‘फ्री रिजर्व्स’ की व्याख्या भी की जाएगी, जो नए कंपनी कानून, 2013 के अनुरूप है। जून को सेबी की बोर्ड बैठक में शेयर बायबैक के संशोधित फ्रेमवर्क पर विचार किया जाएगा।
अधिकारी ने बताया कि नए फ्रेमवर्क में कंपनी के बोर्ड की ओर से बायबैक के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से लेकर ऑफर स्वीकार करने वाले शेयरधारक को भुगतान किए जाने तक की तारीख को बायबैक अवधि मानने का प्रस्ताव है। फाइलिंग की जरूरतों और सार्वजनिक घोषणा के संबंध में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। कंपनी को बायबैक पर फैसले के दो दिन के भीतर सार्वजनिक घोषणा करनी होगी। इस साल मार्च में बायबैक नियमों पर विमर्श पत्र जारी किया गया था। इस पर 150 से ज्यादा टिप्पणियां मिली थीं। उन सभी टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए संशोधित बायबैक नियमों पर फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।
सेबी ने आयकर विभाग को दी 15 हजार कंपनियों की जानकारी
सेबी ने 14,720 कंपनियों की जानकारी आयकर विभाग से साझा की है। इन कंपनियों को अवैध कारोबारी गतिविधियों में लिप्त पाया गया है। बीएसई में स्टॉक ऑप्शंस में कारोबारी अनियमितता को लेकर 59 कंपनियों की जांच के दौरान सेबी को इन कंपनियों में नियमों के उल्लंघन का पता चला। 59 कंपनियों के खिलाफ पहली अप्रैल, 2014 से 31 मार्च, 2015 के बीच कारोबार में नियमों के उल्लंघन की जांच की जा रही थी। बाद में जांच के दायरे में बीएसई में रिवर्सल ट्रेड करने वाली सभी कंपनियों को शामिल कर लिया गया। जांच की अवधि भी 30 सितंबर, 2015 तक कर दी गई। इसी दौरान 14,720 कंपनियों में नियमों के उल्लंघन का पता चला।





